जनता तो आम आदमी पार्टी को पहले ही एक ‘पार्टी’ मान चुकी है

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के उम्मीदवारों के नाम जैसे ही सामने आए, लगभग सभी आलोचना करने लगे और बोलना शुरू कर दिया कि आम आदमी पार्टी खत्म हो गई, उसने लोगों का विश्वास तोड़ दिया। मान लीजिए ये सब सही है लेकिन आप भूल रहे हैं कि यही वह आम आदमी पार्टी है, जिसने कांग्रेस से गठबंधन करके सरकार बनाई थी। वह पार्टी उसी दिन लोगों का विश्वास तोड़ चुकी थी, समझ नहीं आ रहा कि अब कौन सा विश्वास था जो टूटना बाकी था। जनता के पास भी आम आदमी पार्टी की तरह एक ही विश्वास था, उनका तब टूट गया था, इनका अब टूट गया।

पार्टी विद डिफरेंस?
कैसे है आम आदमी पार्टी ‘पार्टी विद डिफरेंस’ यह बात मुझे पहले दिन से समझ नहीं आई। क्या यह पार्टी आसमान से उत्तर कर आई है? या इस पार्टी को इलेक्शन नहीं लड़ना पड़ा जीतने के लिए? जिस दिन से पार्टी बनी है, क्या उस दिन से इस पार्टी में गुटबाजी नहीं है? आपका मानना होगा कि यह पार्टी आंदोलन से निकली है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ था तो थोड़ा सा नींद से जागिए क्योंकि लालू जी की पार्टी, कांग्रेस पार्टी, ये भी आंदोलन से ही निकली हैं तो डिफरेंस कहाँ? आपका काम अलग हो सकता है लेकिन पार्टी औरों से अलग नहीं है। तो जो लोग यह मानकर बैठे थे कि ये पार्टी, पार्टी विथ डिफरेंस है तो समझ नहीं आता कौन सी बात या कौन सी राजनीतिक समझ थी जिस से वे यह मान बैठे।

क्या फर्क पड़ेगा?
फर्क तब क्या पड़ा था, जब कांग्रेस से गठबंधन की सरकार बनाई थी। उसके बाद वे फिर वापस आए पूरे बहुमत के साथ। क्योंकि लोग आपसे पहले जान चुके हैं कि आम आदमी पार्टी भी एक पार्टी ही है। सुना है ना आपने कि मोहल्ले वालों को प्यार का पता पहले चल जाता है, उस लड़का-लड़की से भी पहले, तो जनता पहले ही भांप चुकी है सब। उनको मतलब काम से है राज्यसभा से नहीं और न किसी गठबंधन से। अगर आप काम में विफल होते हैं तो पूरे जीवनभर ईमानदार रहें, इस से जनता को क्या फायदा? आपको वोट देकर उसने आपको काम करने के लिए भेजा है। आम आदमी पार्टी जनता के उन मुद्दों को पकड़ ली है, जिसे वे लोग सीधे प्रभावित होते है। एक आम आदमी को जब घर पर पानी और बिजली का बिल और बच्चे का स्कूल सबसे पहले दिखेगा। उसको क्या मतलब या उसको कैसे समझा देंगे आप कि राज्यसभा में क्या हो रहा है। जनता आम आदमी पार्टी को बहुत पहले ही एक पार्टी मान चुकी है आप भी नींद से जागो।

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