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पॉलिटिकल लव: प्यार के बजट की समीक्षा
इस बार कहाँ जा रहे हो
कासगंज जाने की सोच रहा हूँ
क्यों तुमको भी अपनी रोटियां सेंकनी है वहाँ !
अरे बाबा बस वहाँ दुबारा प्यार भरना है
कविताईः नए बरस की आमद और रद्दी होते कैलेंडर का दर्द
बरस के बीतते इन आखिरी दिनों में/ कैलेंडर की अहमियत घट रही है।
किसान मार्च: जीते हमेशा गांधी हैं, गोडसे कभी नहीं जीत सकता
11 मार्च 2018 को प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी संसद में बोलते हैं कि भारतीय राजनीति में सड़क के संघर्ष और धरना…
