Posted in कविताई ख़ुदकुशी…भवेश दिलशाद (शाद) की नज़्म Estimated read time 1 min read Posted on June 26, 2020November 16, 2022 by लोकल डिब्बा टीम इसी इक मोड़ पर अक्सर गिरा जाता है ऊंचाई से अपनी ज़ात और ख़ाका मिटाया जाता है सब कुछ हो…