Posted in कविताई बुर्क़े हटा के आ गयीं, घूंघट उठा के आ गयीं, ये औरतें कमाल.. Estimated read time 1 min read Posted on March 9, 2020November 16, 2022 by लोकल डिब्बा टीम डर से निजात पा चुकीं, जीने को मरने आ चुकीं, धरने पे मुल्क ला चुकीं, ज़िद इनकी है बहाल, सलाम..