Tag: local dibba
-

विश्व टेलिविजन दिवस: बचपन में टीवी देखने किसके यहां जाते थे?
अब के बच्चों के लिए टीवी पर दर्जनों कहानियां हैं. इतनी कि वो जिन्हें चाहें देख-सुन सकते हैं, छोड़ सकते हैं और कोई पसंद न आए तो अपने मिजाज से पैकेज ले सकते हैं लेकिन उनके पास शायद ही टीवी की अपनी कोई कहानी हो, वो कहानी जिसमें टीवी महज एक सूचना और मनोरंजन का…
-

पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में पैराडाइज चलते हैं…
तो तैयार हो न तुम? क्यों तुम कोई बड़ा बदलाव करने वाली हो क्या प्यार में? सोच रही हूँ कुछ बदल ही लेते हैं अपने इस प्यार में.. अरे, रहने दो पिछले साल जो बदली थी वो आज तक भुगत रहे हैं… हाहाहा, देखो कुछ तो करूँगी ही नवंबर आ गया है देखो जो भी…
-

बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं
“हवा के दोश पे उड़ती हुई ख़बर तो सुनो हवा की बात बहुत दूर जाने वाली है” —हसन अख्तर जलील आज बाजार किसी भी हालात को नहीं छोड़ता, वो चाहे बारिश हो या बाढ़, आग हो या पानी बाजार अपनी जगह बना ही लेता है। दिल्ली आज दिलवालों की नहीं धुआं वालो की हो गई…
-

पॉलिटिकल लव: प्यार का हंगर इंडेक्स कितना है?
तुम इतने लिंक क्यों हो मुझ से? बस डर गया कि कही लिंक न हुआ तो जान न चली जाए, तुम लिंक नहीं करोगे तब भी प्यार का राशन पूरा मिलेगा तुम्हें, फिर ठीक है, तुम सरकार से कितनी अलग हो ना, लव यू! अच्छा इतने सैड मत हो ये बताओ क्या बना रहे हो…
