विकास की आग लोगों के शरीर तक पहुंच रही है

0 0
Read Time:3 Minute, 33 Second

कभी जीवन में किसी अनजान क्षितिज तक पहुँच कर आप भी ऐसे दौर पर पहुँचे होंगे कि कोई हाथ बढ़ाए और आपको दुविधा से बाहर निकाले। हर दौर में जहाँ सहायता करने वालों की कमी नहीं है, वहीं कुछ लोग तमाशबीन बनकर मंजर को देखते हैं। अब लोग तमाशा फेसबुक पर अपलोड करने के लिये भी देखते हैं। पहले लोगों के हाथ मदद करने के लिये आते थे पर अब मोबाइल से विडियो बनाने के काम में।

अदम गोंडवी की एक रचना है-

तुम्‍हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आँकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है

उधर जमहूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वो
इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है, नवाबी है

हम विकास की बात करते हैं, नये-नये मुद्दे पर बहस करते हैं, एक परिवार सूदखोर की वजह से दर्दनाक मौत को परिवार सहित गले लगा लेता है और लोकतंत्र खामोशी साधे हुए है। एक हृदय विदारक दृश्य है चार लोग जिसमें दो मासूम भी हैं, जिन्दा जल रहे हैं और हम विडियो बना रहे हैं, तस्वीरें खींच रहें हैं।
वाह-वाह! शानदार जबरदस्त जिन्दाबाद!
मासूम बच्चे जिन्दा जल रहे हैं और फोटोग्राफी का दौर चल रहा है। ऐसी हृदय विदारक तस्वीर को देखकर लोग भावनात्मक हो जाएंगे और दाम अच्छे मिलेंगे।

आइये मित्रों दो मिनट का मौन उस परिवार के लिये रखने से पहले हम स्वयं को श्रद्धांजलि दे देते है, जब हमारी अन्तर्रात्मा ही मर चुकी है तो सांसों के चलने को जिन्दगी कहने का क्या मन्तव्य रह जाता है। सिर्फ न्यूज चैनल पर रिपोर्ट दिखा देने से हमारा उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता, वास्तव में देखा जाए तो हम सभी बेशर्म और बेहूदगी के उस पड़ाव में पहुँच चुके हैं कि किसी खबर को ये सोचकर दिखाते हैं कि बस इस खबर की टीआरपी से हमें फायदा हो।

ताजमहल, रामरहीम, हनीप्रीत, राधेमाँ, और चोटीकटवा ये है हमारी न्यूज!! हम सच्चाई दिखाते हैं!! टैगलाइन के साथ एक टैगलाइन ये भी जोड़ देनी चाहिए कि हम इमोशन बेचते हैं।

अदम गोंडवी की रचना के साथ इसका समापन कर रही हूँ…
मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की,
यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की,
आप कहते हैं इसे जिस देश का स्वर्णिम अतीत,
वो कहानी है महज़ प्रतिरोध की, संत्रास की,
यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी,
ये परीक्षा की घड़ी है क्या हमारे व्यास की?

इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया,
सेक्स की रंगीनियाँ या गोलियाँ सल्फ़ास की,
याद रखिये यूँ नहीं ढलते हैं कविता में विचार,
होता है परिपाक धीमी आँच पर एहसास की।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *