जन्मदिन विशेष: संगीत का जादूगर ए आर रहमान

अल्लाह रक्खा रहमान, हां यही नाम है संगीत के ‘भगवान’ का। संगीत एक कला है, जिससे भगवान तक पहुंचा जा सकता है। बिना किसी मन्दिर और मस्जिद की ड्योढ़ी तक जाये लेकिन जो भगवान को न मानता हो या जिसे धर्म में आस्था ही न हो, वह ए आर रहमान के संगीत से सजा या उनकी खुद की आवाज में गाया कोई गाना सुन ले आध्यात्म का ज्ञान हो जायेगा।

रहमान एक कला, एक जादू, एक तिलिस्म हैं, जिसके बनने की शुरुआत 11 साल की उम्र में अपने एक दोस्त शिवमणी के साथ कीबोर्ड बजाते हुये हुई थी।
रहमान मिश्रण हैं भारतीयता का जिसको उन्होंने अपने संगीत में पिरोया है। हिन्दुस्तानी,कर्नाटक और पश्चिमी शैली का ऐसा फ्यूजन जिसका तिलिस्म अपने आप में अनोखा और पूरा है। उनका संगीत एक शान्त बहती हुई नदी के जैसा है, जो सरल, सीधी और एक समान बहती जाती है। उनके संगीत में नदी के जैसी सीधी चाल है तो ज्वार-भाटे की तरह का उतार-चढ़ाव जो सीधे किसी दूसरी दुनिया में ले जाता है।

भारत में कई बेहतरीन संगीत निर्देशक हुये हैं, जिनमें सचिन देव बर्मन, नौशाद, राहुल देव बर्मन, शंकर-जयकिशन और भी ना जाने कितने ऐसे नाम हैं, जिन्होंने संगीत का तिलिस्म गढ़ा और अपने जादू से मंत्रमुग्ध किया। इन सभी का एक चरित्र था जो खास किसी दिशा की तरफ ले जाता था लेकिन रहमान इन सबका मिश्रण हैं, जिनमें एस.डी जैसी गम्भीरता आर.डी जैसी चंचलता है।

दलेर मेहंदी रहमान के बारे मे एक किस्सा बताते हैं, रंग दे बसन्ती से जुड़ा है, “जब ए आर रहमान ने मुझे यह कहा कि मेरी नई फ़िल्म रंग दे बसंती के लिए आपको गाना गाना होगा तो मैं ख़ुशी से उछल पड़ा क्योंकि वह गाना पंजाबी में था लेकिन जब मेने रिकॉर्डिंग शुरू की और गाना शुरू किया तो कई बार कोशिश करने के बावजूद भी रहमान सन्तुष्ट नहीं हो पा रहे थे क्योंकि उनको जो आलाप चाहिए था वो लग नही रहा था। #मोहे_मोहे_तू_रंग_दे_बसंती यहां से आगे बात नहीं बन रही थी। आखिर में मैंने मना कर दिया कि रहमान इस को तुम ख़ुद ही गा लो। रहमान ने कहा, ‘नहीं मुझे इस गाने में पंजाब की मिट्टी की महक चाहिए जो तुम ही दे सकते हो, मैं नहीं मुझे तुम पर पूरा यकीन है। उसके बाद बताने की जरुरत नहीं है कि ‘मोहे मोहे तू रंग दे बसंती” ने क्या कमाल किया।

रहमान के द्वारा संगीतबद्ध और उन्हीं की आवाज में गाया “वन्दे मातरम” पूरी भारतीयता का दर्शन समझा देता है कि भारत है क्या? भारत को समझने के लिये इस गाने को कई बार लगातार सुना जा सकता है। रहमान ने दुनिया भर के फिल्मकारों, संगीतकारों और गीतकारों के साथ जोड़ी बनाई लेकिन मणिरत्ननम के साथ जो कमाल किया वह अपने आप में अद्वितीय है। मणिरत्नम की फिल्मों – रोजा, बॉम्बे, दिल से, गुरु ने रहमान को रहमान बनाने में बहुत सहायता की। छोटे संगीत कैरियर में चार राष्ट्रीय, पंद्रह फिल्मफेयर, दो ग्रैमी पुरस्कार, गोल्डन ग्लोब अवार्ड और एक ऑस्कर हासिल करने वाले रहमान पहले भारतीय हैं।

रोजा, बॉम्बे, दिल से, रंगीला, साथिया, सपने, ताल, पुकार, लगान, फिज़ा, जुबैदा, गुरू, रांझना, स्वदेश, रंग दे बसंती, जोधा अकबर, राकस्टार, गजनी, स्लमडाग मिलेनियर, जाने तू या जाने ना, देलही 6, राँझना और हाईवे उनके संगीत से सजीं शानदार हिंदी फिल्में हैं। उन्होंने खुद कई गाने गाए हैं। ओ हमदम तेरे बिना क्या जीना (गुरू), बंजर है सब बंजर है (साथिया), लुक्का-छिप्पी बहुत हुई और रूबरू रौशनी (रंग दे बसंती), ये जो देश है तेरा (स्वदेश), ख्वाजा मेरे ख्वाजा (जोधा अकबर) और दिल से रे (दिल से)।

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