प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।

पॉलिटिकल लव: क्या मेरा ‘विश्वास’ तोड़ दोगे?

तुम मेरे लिए कुछ नया कब करोगे? देखो, मैंने तुम्हारे लिए साल को नया कर दिया। चलो फिर न्यू ईयर गिफ्ट दो। अच्छा जी सब […]

नव वर्ष कुछ यूं क्यों ना मंगलमय हो?

नव वर्ष की अनन्त शुभकामनाएं एवं बधाई। सभी बड़ों को प्रणाम और छोटों को ढेर सारा प्यार। आप सभी को एक-एक महीना, एक एक सप्ताह, […]

हैप्पी न्यू ईयर 2018: काश ये साल महज़ इवेंट के नाम न रह जाए

एक से एक इवेंट हो रहे हैं हमारे देश में, कुछ  सफल हो जाते हैं और कुछ असफल, हाल ही के वर्षों में बहुत से […]