Category: गेस्ट राइटर
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खबरगांव चैनल का मालिक कौन है, कहां से चलता है?
इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, खबरगांव एक चैनल है। इसका एक यूट्यूब चैनल और एक वेबसाइट भी है और फेसबुक, इंस्टाग्राम पर भी है। यूट्यूब पर इसके वीडियो खूब देखे जाते हैं और लाखों फॉलोवर भी हैं। इसकी वेबसाइट पर अलग-अलग तरह के विश्लेषण छापे जाते हैं। यूट्यूब पर इस चैनल की तुलना लल्लनटॉप…
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विकलांग को दिव्यांग कहने का समाज में कितना असर हुआ?
दिव्यांग शब्द सुनते ही हर किसी के मन में दया का भाव पैदा होता है। बड़ी तत्परता से लोग सहानुभूति दिखाने को आतुर हो जाते हैं लेकिन वही लोग कई बार मौका आने पर पीछे भी हट जाते है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो संबोधन कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा था कि…
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नेहरू कुछ अच्छा कर गए हैं तभी उनकी आलोचना हो रही है
राहुल सांकृत्यायन. ऐसे समय में जब किसी व्यक्ति पर सबसे ज्यादा हमला हो तो यह अपने आप समझा जाना चाहिए कि वह कितना योग्य रहा होगा. ऐसा ही कुछ पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ हो रहा है. तमाम उम्दा यादों के बीच घिरा यह शख्स आज जब याद किया जाता है तो सबसे ज्यादा…
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कहावत ‘उड़ता तीर‘ लेने की थी पार्टियों ने ‘उड़ता जेट’ ले लिया
डिजिटल होती दुनिया और टेक्नोलॉजी के इस दौर में सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है. स्मार्टफोन के मॉडल से लेकर एंड्राइड OS इतनी तेजी से अपडेट हो रहे हैं. इतनी तेज़ी से तो घर के बच्चे भी बड़े नहीं होते. दस में से साढ़े नौ जेब में टुनटुनाने वाले शियोमी के स्मार्टफोन की…
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कहाँ पहुँचेगा वो कहना ज़रा मुश्किल सा लगता है
लोकल डिब्बा पर पढ़िए चर्चित शायर भवेश दिलशाद की ग़ज़ल..’लगता है.’ कहाँ पहुँचेगा वो कहना ज़रा मुश्किल सा लगता है, मगर उसका सफ़र देखो तो खुद मंज़िल सा लगता है. नहीं सुन पाओगे तुम भी ख़मोशी शोर में उसकी, उसे तनहाई में सुनना भरी महफ़िल सा लगता है. बुझा भी है वो बिखरा भी कई…
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वे मुद्दे जिनपर सवाल पूछते ही आप ‘देशद्रोही’ हो सकते हैं
समस्त देशवासियों को मेरा नमस्कार, आज हमने गत वर्षो की भांति गणतंत्र दिवस मनाया। कोई बदलाव नहीं हुआ, कुछ नया नहीं हुआ, विगत वर्षों में मनाए गए गणतंत्र दिवस में और आज 69वें गणतंत्र दिवस पर, कुछ बदलता भी है तो वह है गिनती, 68वां मनाया था, 69वां मना रहे हैं और 70वां मनाएंगे, सुबह…
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सपनों के ‘सी-प्लेन’ पर उड़ता एक आम नागरिक
आज पापा का मेरे ‘स्वदेशी’ वाले नम्बर पर कॉल आया। बोल रहे थे कि देश में इतना सौहार्द और भाईचारा वाला माहौल बना हुआ है इसलिए घर पर आओ कुछ दिन अपने भाइयों के साथ भाईचारे और हमारे साथ सौहार्द से रह लेना। मैं पूछा कैसे आऊं? तो पापा ने इतना ही कहा था कि…
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नव वर्ष कुछ यूं क्यों ना मंगलमय हो?
नव वर्ष की अनन्त शुभकामनाएं एवं बधाई। सभी बड़ों को प्रणाम और छोटों को ढेर सारा प्यार। आप सभी को एक-एक महीना, एक एक सप्ताह, एक-एक दिन, एक-एक घण्टा औऱ एक-एक सेकेंड मुबारक हो। उठते-बैठते, सोते-जागते खाते-पीते जो भी आपके साथ हो वह सब कुछ आपको मुबारक हो। हाँ, तो आपको बहुत मुबारकबाद दे दी…
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हैप्पी न्यू ईयर 2018: काश ये साल महज़ इवेंट के नाम न रह जाए
एक से एक इवेंट हो रहे हैं हमारे देश में, कुछ सफल हो जाते हैं और कुछ असफल, हाल ही के वर्षों में बहुत से इवेंट हुए हैं, और अभी आगे देखना बाकी है कौन कौन से इवेंट होंगे या होने वाले हैं। जैसे किसी मूवी का ट्रेलर आता है बाद में मूवी पर इनका…
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कहानी: जीते कोई भी हारी फिर से नारी है
मेरा गाँव बिहार के एक छोटे से कस्बे में पड़ता है। मेरे घर से कुछ दूर पर एक छोटा सा परिवार रहता था, हर तरह से खुश और हर तरह से सम्पन्न परिवार था। यूँ कह लें तो किसी चीज़ की कमी नहीं थी। बस दुख था उन्हें तो यही था कि कोई बेटा नहीं…