भगोड़े बने थे भाजपाई अब हालत धोबी के कुत्ते जैसी

राजनीति में दल बदलना कोई बड़ी बात नहीं। पिछले साल से तो यह अब हर विधानसभा चुनाव में देखने को मिल जाता है। यहां वो कहावत बड़ी फिट बैठती है ‘जहां खीर वहीं फिर’ पर कभी कभार ऐसे लोगों की हालत धोबी के कुत्ते जैसी हो जाती है यानी न घर का, न घाट का। कुछ ऐसा ही हाल मणिपुर विधानसभा के वक्त अपनी ही पार्टी से बगावत कर भाजपा में जाकर पुनर्वास पाने वाले कांग्रेसी विधायकों की होने वाली है।

खबर है कि इसी साल मार्च में चुनाव के वक्त जिन 6 विधायकों ने कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का भगवा दामन थामा था उन सभी विधायकों को अब भाजपा ने कोई भी मंत्री पद देने से इनकार कर दिया है। उधर कांग्रेस ने भी इस बात का ऐलान कर दिया है कि भाजपा में गए भगोड़ों को अब कांग्रेस पार्टी कतई वापिस नहीं लेगी यानी उनके लिए कांग्रेस के सभी द्वार अब सदा के लिए बंद हो गए हैं।

दरअसल, हाल ही में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने शिलाँग में कहा था कि जो लोग पार्टी छोड़कर गए उनका दोबारा स्वागत नहीं किया जाएगा।

वहीं इस पर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का कहना है कि कांग्रेस से आए इन विधायकों के साथ मंत्री पद देने जैसी कोई सौदेबाजी नहीं हुई थी। बीरेन सिंह का कहना है कि “उनको पता था कि जिस तरह से हमारी सरकार काम कर रही है, जिस तरह से हम विकास कार्य करने में जुटे हुए हैं उससे अगले चुनावों में उनके जीतने के अच्छे चांस हैं, बस इसी को देखकर वे कांग्रेस से भाजपा में आएं हैं।”

उधर 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे और और अब नेता प्रतिपक्ष ओकराम इबोबी सिंह और अन्य नेता इन दल-बदलुओं को कांग्रेस में वापिस न लेने के फैसले से बहुत खुश हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस ने ऐसे बागियों को अयोग्य ठहराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष वाई. खेमचंद के पास जा सकती है। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया है पर इबोबी सिंह की मानें तो यह अभी तक टैक्टिकल मूव के तहत नहीं किया गया है जबकि पार्टी वन मंत्री टी. श्यामकुमार को अयोग्य ठहराने में हो रही देरी के खिलाफ हाई कोर्ट गई थी।

वैसे 15 मार्च को शपथ ग्रहण करने के बाद से भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में चीजें कुछ खास ठीक चल नहीं रहीं। खबर है कि 6 संसदीय सचिवों ने कथित रूप से इस्तीफा दे दिया है। दरअसल, मंत्री जिस तरीके से उन्हें और उनके लिए फैसलों को बाईपास कर रहे हैं वह बात इन सचिवों को पसंद नहीं आई और उन्होंने नाराज हो कर इस्तीफा दे दिया। वहीं सचिवों के इस कदम पर मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह का कहना है कि उन्होंने वैकल्पिक इंतजामों के लिए यह इस्तीफे दिए हैं।

गौरतलब है कि राज्य में विकास कार्यों की बात पर पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह का कहना है कि राज्य सरकार से कुछ भी नया नहीं किया है बल्कि कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई योजनाओं का ही नाम बदला गया है।

बहरहाल, बात जो भी हो पर इन बागियों की हालत अब बिलकुल उसी धोबी के कुत्ते जैसी हो गई है जो न घर का है न घाट का। वैसे इन सब में सुशासन बाबू नीतीश जी और सिद्धू पाजी जैसों का ख्याल आता है जो ऐसे बागियों के बेहतरीन सफल उदहारण है। इनमें और उनमें फर्क इतना है कि मणिपुर के ये विधायक भले ही न इधर के हैं न उधर के पर हमारे नीतीश बाबू क्रेडिबिलिटी खो कर भी, ड्यूल सिम कहलाकर भी सत्ता की कुर्सी पर तो विराजमान तो हैं न जी !

इस लेखक के और लेख

मीडिया का ग्लैमर और वास्तविकता

कहानी: तीन दोस्त, सियासी गिद्ध और मौत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

April 2026
S M T W T F S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
2627282930