Author: अभय
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पॉलिटिकल लव: इश्क का बत्तख बाढ़ में उतारो पिया
यार यहाँ साँस लेने में दिक्कत हो रही है। अच्छा जाओ बतख वाले तालाब में। ठीक है असम की टिकट कराओ फिर। क्यों तुम्हारे यहाँ बतख नहीं है क्या ? बतख तो है पर ऑक्सीजन वाली सिर्फ असम में ही मिलेगी। तुम्हें एक बात बताएं GDP के बारे में। हां बताओ मेरी जान क्या…
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पॉलिटिकल लव: सैंया रूठो मगर दुश्मन के दर न जाओ
तुम कोई फोटो क्यों नहीं खिंचवाते हो? अरे हमें पसंद नहीं है ये सब। अच्छा जी फिर फोटोग्राफी डे पर क्या डालोगे एफबी पर? तुम्हारे कार्ड की फोटो डाल देंगे। अच्छा जी, कुछ तो लोग कहेंगे! बाबा, लोगों का काम है कहना। तुम मुझे नाराज कर दिए हो। अरे बाबा किस बात से नाराज हो…
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पॉलिटिकल लव: प्यार की साइकिल जरा धीरे चलाओ पिया
तुम साइकिल चला लेते हो ? अरे बाबा मैं कहां चला पाता हूं, और तुम? मेरा भी तुम्हारे वाला हाल है। चलो सही है जिसको चलानी आती है वो भी तो गिर रहा है। अरे वो तो कुछ ज्यादा ही ‘तेज’ है इसलिए गिर गए। अच्छा जी तुम भी कोई कम तेज नहीं हो सब…
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पॉलिटिकल लव: हेलो फ्रेंड्स, पासपोर्ट बनवा लो
भूख लगी है बहुत जोर से। कुछ खा क्यों नहीं लेते फिर तुम! अरे बेबी पैसे ही नहीं है। अच्छा मैंने तो सुना था सबका 50% बढ़ा था। अरे सबका कहां, बस स्विसवालों का ही बढ़ा है। अच्छा तो अब 15 का 30 लाख मिलेगा न? वो क्यों जानेमन? अरे अब ज्यादा काला धन वापस…
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नोटबंदी का काम कुछ बंद करना नहीं बल्कि काले को सफेद करना था?
मैं नोटबंदी हूं, मेरा जन्म 8 नवंबर 2016 को हुआ था। मेरे पैदा होने की बात बस घर के कुछ लोगों को ही पता थी। जब थोड़ा और वक़्त बीता तो बातें साफ होने लगीं। पता चला कि मेरे घर के अलावा भी कई लोग जानते थे कि मैं आने वाली हूँ, गुजरात वाले फूफा…
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पॉलिटिकल लव: भारतीय राजनीति का धरनेबाज आशिक कौन?
तुम तो मेरी तरफ देखते तक नहीं हो। कैसे देखूं, हर बात पर ज़िद करे बैठी रहती हो। अरे तो कौन सुनेगा मेरी ज़िद ये बताओ? लेकिन हर बात पर तो ज़िद अच्छी नहीं लगती न! मैं तो करूंगी और तुम्हें मानना भी पड़ेगा। मैं तो मान लूंगा, देखो नसीब वाले फूफा कब दिल्ली वाले…
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पॉलिटिकल लव: 2019 आया करीब, बदले प्रधानसेवक के नसीब
तुम नागपुर जा रहे हो? हां जा रहा हूँ वहाँ पर कुछ काम से। तो बताओगे क्यों जा रहे हो, कब से पूछ रही हूँ। जो बोलना होगा नागपुर में ही बोलूंगा। क्यों अभी तुम्हारे मुंह में दही जम गई है क्या ? नहीं ऐसा नहीं पर मैं वहीं बोलूंगा। पता नहीं नागपुरवालों ने क्या…
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पेट्रोल: घर का बिगड़ा हुआ लड़का जो हाथ से निकल गया है
BY: @Abhay देश में बदलाव हो रहे हैं, देश आगे बढ़ रहा है तो पेट्रोल क्यों रुके भला? उसको भी आगे बढ़ने का पूरा हक है। वैसे भी पेट्रोल कब किसके रोकने से रुका था। उसको न अर्थशास्त्री रोक पाए और न ही नसीब वालों से रुका, वो बढ़ता ही रहा..खूब बढ़ा। पेट्रोल घर के एक ऐसे…
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पॉलिटिकल लव: प्यार का गठबंधन अपवित्र ना हो जाए
अब तुम मेरे हिसाब से नहीं चलते हो। अरे चलता तो हूँ मेरी जान। कहाँ रुकते हो तुम बेहिसाब बढ़े जा रहे हो। अरे तो तुम क्यों कच्चे तेल की तरह रुक गई हो। तो अब मैं भी पेट्रोल बन जाऊं क्या? बन जाओ आजकल तो इसी के अच्छे दिन हैं। तुम न मेरे निर्देश…
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पॉलिटिकल लव: तूफान के इंतजार में, ‘बेबी’ लुट गया प्यार में
तुम बहुत बोलते हो। अरे कहाँ बोलता हूँ मैं! बस करो ये बताओ तुम्हारा रिमोट किसके पास है? तुम्हारे पास तो है बेबी। अरे रिमोट में तो म्यूट बटन काम ही नहीं कर रहा। वो तो मैंने रिमोट देने से पहले ही खराब कर दिया था। तुम भी किसी चीज़ के दावेदार हो कि नहीं…