वह लोकतंत्र कभी मज़बूत नहीं कहला सकता जिसमें विरोधी देशद्रोही तक गिने जाने लगें और बहुमत पक्ष जो मर्ज़ी कर…
Author: अभय
क्लिकबेट वाला मीडिया और मौत में दफन होते मुद्दे
एक गाना याद आ रहा है ‘भूल गया मैं सब कुछ, अब याद नहीं है अब कुछ’ यही हाल मीडिया…
पॉलिटिकल लव: हमारे विकास का मुद्दा चुनावी नहीं है
तुम लव लेटर रोटोमैक से लिखते हो क्या क्यों क्या हो गया जी हुआ कुछ नहीं बस तुम्हारे लेटर में…
पॉलिटिकल लव: वैलेंटाइन, नागपुर और वॉरियर का कॉकटेल
चलो न वेलेंटाइन डे आ रहा है कहीं घूमने चलें, हां, चलो वहाँ चलते हैं जहाँ नफरत हो, क्यों वहाँ…
पॉलिटिकल लव: प्यार के बजट की समीक्षा
इस बार कहाँ जा रहे हो कासगंज जाने की सोच रहा हूँ क्यों तुमको भी अपनी रोटियां सेंकनी है वहाँ…
पॉलिटिकल लव: चलो प्यार का बजट बनाते हैं!
प्यार के बजट का क्या सोचा तुमने, सोच लिया है बस प्यार का विकास ही विकास होगा
पॉलिटिकल लव: हाफ पैंट पहनकर नागपुर ना पहुंच जाना
चलो इंदौर चलते हैं चलो लेकिन ध्यान देना कहीं नागपुर न पहुँच जाओ अरे, चिंता मत करो हम इंडिगो से…
अपनी प्राइवेसी छिनने पर क्या सोचता है आधार?
आप बस अपनी प्राइवेसी की सोचते हो, क्या आपने मेरा कुछ सोचा कभी, मैं इतनी जगह लिंक होकर कैसा फील…
पॉलिटिकल लव: प्यार का डेटा 500 रुपये में लीक ना कर देना
तुम बहुत चिलाती हो। तो क्या करू तुम्हारी हरकते ही ऐसी है। लगता है तुम्हारे स्पीकर पर भी बैन लगना…
पॉलिटिकल लव: प्यार में क्या सिर्फ ओवरटाइम होता है?
तुम क्या करने वाली हो? मैं प्यार में कानून लाने वाली हूँ, देखो, कानून ऐसा लाना जो दोनों के लिए…