पॉलिटिकल लव: हमारे विकास का मुद्दा चुनावी नहीं है

एक बात बोलें, अपने दोस्त को बोल दो हमारे प्यार के बीच दखल न दे
हां तुम प्यार में मनमानी करते रहो और कोई कुछ बोले ना
मैं कोई मनमानी नहीं कर रहा, ये हमारे प्यार के लिए अच्छा है
हां जब से मालदीव से आये हो ऐसी ही बातें कर रहे हो

तुम्हारे और मेरे बीच खाई बढ़ती जा रही है
क्यों कोई रिपोर्ट आई है क्या हमारे प्यार की
हां रिपोर्ट आई है पहले तुम ज्यादा प्यार करते थे
पहले कब 1991 से पहले क्या
हां, जब से तुम उदार हुए हो तब से मुसीबत बढ़ गई है

प्यार के विकास को क्या करना चाहिए हमें
दो इंजन लगाने चाहिए
ठीक है लेकिन ये दोनों इंजन लगेंगे कहां
एक तुम्हारे घर पर लगेगा और मेरे घर
लग रहा मेघालय वाली रैली सिरियसली अटेंड कर रहे हो
पर हमारे विकास का मुद्दा चुनावी नहीं है
अरे मैं जानती हूँ मेरी जान

अच्छा हम दोनों में से प्यार का इज़हार किसने किया था
तुमने ही किया था मुझे याद रात के टाइम
नहीं मैंने नहीं किया था
अरे अब मान जाओ अब तो ‘आप’ भी मान गई रात वाली बात
बस तुम कह रही हो मान लेता हूँ पुलिस मत बुला देना मनवाने के लिए

प्यार में बड़ा घाटा हो रहा है
अच्छा तो प्यार को भी प्राइवेट कर दें क्या
घाटा हुआ तो ठीक करेंगे ये बेवकूफी नहीं
सरकार तो यही कर रही है घाटा हो रहा तो प्राइवेट कर दो
तो हम सरकार जैसे कामचोर नहीं हम प्यार में मेहनत करेंगे
ये ठीक बोला तुमने मैं भी तुम्हारा साथ दूँगा

तुम मेरी इतनी अनदेखी क्यों कर रहे हो
अरे बाबा बस थोड़ा काम कर रहा था
अच्छा ये बात है मुझे लगा मैं कनाडा से आई हूं इसलिये ऐसा कर रहे हो
अरे तुम चाहे जहाँ से आओ मैं तुम्हारी अनदेखी नहीं करूंगा
बस यही तो फर्क है तुम में और सरकार में

तुम कहाँ जा रहे हो
थोड़ा इंडिया से बाहर जाना है काम से
काम से जा रहे हो या घोटाला कर के निकल रहे हो
क्यों मैं तुम्हें शक्ल से हीरा व्यापारी लग रहा हूँ
अरे नहीं तुम भी पीएनबी से लोन लिए थे न
अरे वो एजुकेशन लोन है 11400 करोड़ का लोन नहीं है

तुम लव लेटर रोटोमैक से लिखते हो क्या
क्यों क्या हो गया जी
हुआ कुछ नहीं बस तुम्हारे लेटर में काफी घोटाले नज़र आ रहे हैं.
लगता है आज कल न्यूज़ ज्यादा देख रही हो हर जगह घोटाला ही दिख रहा है तुम्हें

अच्छा तुम्हारा सरनेम क्या है
अरे आज एकदम से सरनेम पूछ रही हो सब ठीक है ना
अरे जो पूछा उसका जवाब दो सवाल न करो
तुम चिंता मत करो मेरा सरनेम मोदी नहीं है
फिर ठीक है पता चले उड़ कर चले गए तुम झोला उठा कर चल दो

हम भी प्यार में कुछ बदलाव करते हैं
क्यों प्यार में भी कुछ ‘अपमानजनक’ नाम है क्या
हां सोच रही हूँ ये ‘मेला बाबू’ को बदल दूं
चलो फिर इसके लिए योजना बनाओ

यार बड़े घोटाले हो रहे है यहाँ
तो यहाँ से कहीं और चले क्या!
हां चलो अब यहां रुकने का मन नहीं है
लोकल डिब्बा पकड़ कर पॉलिटिकल के सफर पर चलते हैं

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

इस लेखक के और लेख

क्या अराजकता को बीजेपी से जोड़ना ट्रेंड बन गया है?

देहाती आदमी का प्रधानमंत्री को खुला पत्र! मुझे पइसा उधार दे दो..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

April 2026
S M T W T F S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
2627282930