Author: अभय
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बता मेरे देश भगत सिंह वाली आज़ादी कब आएगी?
जो उजाला उसके सिर पर है, वह उसके जीवन में कब आएगा? बता मेरे देश वह गांधी का सपना कब पूरा हो जाएगा? जो देख रहा है उजाले को वह कब उसमें जी पाएगा? बता मेरे देश लोहिया का समाजवाद कब पूरा हो जाएगा? जो दिखा रही है रोशनी, उसके जीवन में कब सुनहरा पल…
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जो वह बेच रहा था, वह उससे ही दूर था
जो वह बेच रहा था, वह उससे ही दूर था, अब याद आ रहा है, मार्क्स का वह अलगाववाद जो उसके बहुत करीब था। वह ना जाने कब उस तक पहुंच पाएगा, जो वह बेच रहा वह उसको कब खरीद पाएगा? अब याद आ रहा है, कि लोहिया के समाजवाद से वो कितना दूर था।…
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पॉलिटिकल लव: प्यार को सुप्रीम कोर्ट की तरह सीरियस लो
तुम इतने गोरे कैसे हो रहे हो? अरे घर पर रहने का यही फायदा है, मुझे लगा तुम भी मशरूम खाने लगे हो! अरे नहीं इतना पैसा नहीं है मेरे पास की 80 हज़ार का मशरूम खाऊं, अच्छा चलो फेयर हैंडसम लगा लेना, हमारा प्यार कैसा लगता है तुम्हें? बिल्कुल विकास की तरह. देखो, कहीं…
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पॉलिटिकल लव: प्यार में ईवीएम जैसा बहाना मत बनाना
हमारे प्यार में कितनी बँधाएं हैं ना? कितनी भी हों राम मंदिर से कम ही हैं, वैसे राम मंदिर की बंधाएं दूर हो गई हैं, तुम भी क्या नागपुर वालों पर भरोसा कर लेती हो, तुम मेरा दिल कैसे जीतोगे? वैसे ही जैसे बीजेपी निकाय चुनाव जीतती है, देखो ईवीएम में कुछ गड़बड़ मत…
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पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ विवाद करते हैं
तुम भी भारतीय रेल हो गए हो अरे क्या हुआ ऐसे क्यों बोल रही हो? जब देखो जब तुम्हारी हालत खस्ता ही नजर आती है. हाहाहा, कहो तो वास्कोडिगामा बन जाऊं रहने दो आज वो भी पटरी से उतर गए. अच्छा तुम मुझसे कितना प्यार करते हो? उतना ही जितना पाकिस्तान हाफिज सईद से, यानी…
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पॉलिटिकल लव: कहां लिखा है कि प्यार में चॉकलेट देना ही है?
अच्छा ये कहां लिखा है कि प्यार में चॉकलेट देना ही है! लिखा तो ये भी नहीं है दिल्ली देश की राजधानी है! हाहाहाहा, ये भी सही बोली तुम तो लाओ मेरी चॉकलेट बिना सवाल किए हुए। तुम हर बार मेरी अक्स का मुद्दा लेकर बैठ जाती हो, अरे तो तुमने कांड ही इतने किए…
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भुख्खड़ प्यार: आओ तुम्हें बंदगोभी जैसा दिल में कैद कर लूं
जब किसी ऐसे बन्दे को प्यार हो जो बहुत खाता हो तो क्या होगा …. यार तुम मुझे अपना बना लो, मैं हरदम समोसे के आलू जैसा तुम्हारे साथ रहूँगा नहीं यार मैं थोड़ा चाइनीज पसंद करती हूँ, पता नहीं तुम कहीं छोले कुलचे जैसा बोर निकले तो क्या होगा नहीं-नहीं मैं कभी छोले कुलचे…
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पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में पैराडाइज चलते हैं…
तो तैयार हो न तुम? क्यों तुम कोई बड़ा बदलाव करने वाली हो क्या प्यार में? सोच रही हूँ कुछ बदल ही लेते हैं अपने इस प्यार में.. अरे, रहने दो पिछले साल जो बदली थी वो आज तक भुगत रहे हैं… हाहाहा, देखो कुछ तो करूँगी ही नवंबर आ गया है देखो जो भी…
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बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं
“हवा के दोश पे उड़ती हुई ख़बर तो सुनो हवा की बात बहुत दूर जाने वाली है” —हसन अख्तर जलील आज बाजार किसी भी हालात को नहीं छोड़ता, वो चाहे बारिश हो या बाढ़, आग हो या पानी बाजार अपनी जगह बना ही लेता है। दिल्ली आज दिलवालों की नहीं धुआं वालो की हो गई…
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पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ राष्ट्रीय करते हैं
चलो प्यार में कुछ राष्ट्रीय करते हैं हां सोच रहा हूँ प्यार में राष्ट्रीय भोजन ले आऊँ लेकिन देखना खिचड़ी जैसा बोरिंग भोजन मत ले आना तुम बीमार थोड़ी हो जो तुम्हें खिचड़ी खिलाऊँ आज कल बड़े-बड़े फैसले लेने लगे हो, क्या बात है? बस कुछ बदलाव का मन कर रहा था चलो सही है…