Author: लोकल डिब्बा टीम
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काश! इश्क़ की बातें होतीं
काश के मेरा नाम इश्क़ होता तुम्हारा नाम भी इश्क़ होता क्या होता जब सबका नाम इश्क़ होता। हम जिस देश में रहते उस देश का नाम इश्क़ होता हमारे घर का पूरा पता इश्क़ होता, वो इश्क़ में बोलता मै उसे इश्क़ में सुनता कैसा होता जब हम सबकी बोली में ही शामिल इश्क़…
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क्रांति धरा मेरठ: सिर्फ तीस मार खां बसते हैं यहां!
क्रांतिधरा मेरठ ऐंवई नाम के साथ बदनामी लेकर नहीं चल रही है। एक से एक तीस मार खां बसते हैं यहाँ। ताज़ा उदाहरण सरधना के सोम साहब हैं। अब पता नहीं किस झोंक में जनाब ने 5 करोड़ का इनाम भंसाली के सिर पर रख दिया। ऐसे ही कुछ साल पहले मेरठ में, एक कुरैशी…
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विश्व टेलिविजन दिवस: बचपन में टीवी देखने किसके यहां जाते थे?
अब के बच्चों के लिए टीवी पर दर्जनों कहानियां हैं. इतनी कि वो जिन्हें चाहें देख-सुन सकते हैं, छोड़ सकते हैं और कोई पसंद न आए तो अपने मिजाज से पैकेज ले सकते हैं लेकिन उनके पास शायद ही टीवी की अपनी कोई कहानी हो, वो कहानी जिसमें टीवी महज एक सूचना और मनोरंजन का…
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सबकुछ ठीक हो जाएगा बस खुद को शून्य बना लीजिए…
एक से एक इवेंट हो रहे हैं हमारे देश में, कुछ सफल हो जाते हैं और कुछ असफल। हाल ही के वर्षों में बहुत से इवेंट हुए हैं और अभी आगे देखना बाकी है कौन कौन से इवेंट होंगे या होने वाले हैं। जैसे किसी मूवी का ट्रेलर आता है, बाद में मूवी पर इनका…
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कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?
तुम्हारे कुछ चुंबन बचे हैं मेरे होठों पर कुछ मेरे भी बचे हों शायद तुम्हारे पास ये हमारे पहले चुंबन नहीं थे ये चुराये हुये थे तुम्हारे पहले प्रेमी और मेरी पहली प्रेमिका से शायद उन दोनों को चूमना नहीं आता था चुराये हुये चुंबनों का स्वाद बहुत तीखा होता है इनमें मिली होती है…
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घास इन कोठेवालियों की दूर की रिश्तेदार है
जैसे बिन बोए उग आती है घास जमीन के हर हिस्से पर ठीक वैसे ही कुछ लड़कियां उगती हैं शहर की हर गली – हर नुक्कड़ से घास की तरह इनका हरापन तुम्हें ललचाता तो है मगर तुम इन्हें घर से दूर ही रखते हो क्योंकि हर हरी चीज गमले में नहीं लगाई जाती। ये…
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ये मेरे हिन्दुस्तान को कौन सा रोग लग रहा है भाई!
तुम हिन्दू हो ,मै मुस्लिम हूं। तुम्हारा रास्ता मंदिर तो मै मस्जिद को जाता हूं। तुम टीका लगाते हो तो मै टोपी पहनता हूं, तुम पूजा करते हो तो मैं नमाज अदा करता हूं। तुम गीता पाठ करते हो तो मैं कुरान तिलावत करता हूं। तुम भगवान को ईश्वर कहते हो तो मैं अल्लाह बुलाता…
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लप्रेक: एक ऑफलाइन मुलाकात
आज जब तुम मिली तो पता नही क्यों फेसबुक और व्हाट्सऐप की डीपी से ज्यादा सुन्दर लगी ? शायद वास्तविकता की यही खूबसूरती है। वहाँ तो तुम्हे देखकर झटपट लाइक कर दिया करता था, मगर आज मुझे तुम्हें देखना है, देखना है तुम्हारे चेहरे को जिसमें जिंदगी के फिल्टर्स साफ नज़र आ रहे हैं (…
