Author: लोकल डिब्बा टीम

  • महिलाओं की लड़ाई पुरुषों से नहीं समाज से है
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    महिलाओं की लड़ाई पुरुषों से नहीं समाज से है

    भारत में आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार जैसे विषयों पर महिलाओं कि स्थिति अब भी बहुत ज्यादा नहीं बदल पायी है।कुछ बदलाव जरूर देखने को मिलते हैं लेकिन ये काफी नहीं हैं। आज से कुछ दशक पहले महिलाओं पर सत्ती प्रथा, बाल विवाह ,विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह पर रोक जैसे तरह-तरह के अत्याचार होते…

  • क्या है वाल ऑफ़ काइंडनेस की कहानी?

    क्या है वाल ऑफ़ काइंडनेस की कहानी?

    दुनिया में दीवारों की कमी नहीं है। अनगिनत दीवारें हैं। हर घर में कई दीवारें हैं जिन पर छत टिकी है और उन छतों पर उम्मीदों का आसमान बिछा है। देश दुनिया की मशहूर दीवारों में चीन की दीवार है जिसे दुनिया का अजूबा माना गया है। जर्मनी को बाँटती मशहूर बर्लिन की दीवार है…

  • क्या ठरकी पत्रकारिता के अच्छे दिन चल रहे हैं?

    क्या ठरकी पत्रकारिता के अच्छे दिन चल रहे हैं?

    तथ्यपरक सवाल, वस्तुपरख पत्रकारिता, सरकार से उद्देश्यपरक सवाल अब नही पूछे जाते हैं। जनवादी पत्रकारिता अब विरले ही देखने को मिलती है। समय के साथ साथ देश, देश की मानसिकता, देश की शासन पद्धति  सब कुछ बदली है, तो इस बदलाव के लहर से पत्रकारिता भला कैसे अछूती रहती? पहले पत्रकारिता व्यापक नही थी, जनसमूह…

  • पॉलिटिकल लव- दिल से चाहो तो सब कुछ मिलता है

    पॉलिटिकल लव- दिल से चाहो तो सब कुछ मिलता है

    समझ नहीं आ रहा अपने प्यार की कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी? उतनी ही जितनी देश विकास की चुका रहा है. हा  हा हा। लगता है जान ही जाएगी फिर। प्यार के रिश्ते को दुनिया ने बदनाम कर दिया। हां मेरी जान! जैसे बाप बेटी के रिश्ते को मीडिया ने बदनाम कर दिया है। हा हा…

  • बिना गंदगी में उतरे गंदगी साफ नहीं की जा सकती

    बिना गंदगी में उतरे गंदगी साफ नहीं की जा सकती

    एक इंसान किसी गन्दगी के ढेर को साफ़ करने का संकल्प ले कर जाता है और गन्दगी के ढेर की सफाई करते-करते अचानक उसी ढेर में गिर जाता है और गन्दगी के छीटे उसके ऊपर भी पड़ जाते हैं, अब वो इंसान तिलमिला कर वहां से निकलता है और अपने शरीर की गन्दगी साफ़ करता…

  • त्योहार नहीं मातम का दिन है मुहर्रम

    त्योहार नहीं मातम का दिन है मुहर्रम

      इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम का दिन है. आज भी उनके अनुयायी इस दिन शोक मनाते हैं, काले कपड़े पहनते हैं और मातम करके रोते हैं। ताज़िया जो हर शहर गाँव में आज शाम उठाया जाएगा, यह एक निशानी है कि जिस…

  • विरोध करने की आजादी

    विरोध करने की आजादी

    सच कहने की आजादी से महरूम हैं हम विरोध करने की आजादी में मशरूफ हैं हम इंसान की कौम का कुछ भी पता नहीं धर्मों के बटंवारे की राजनीति में मशरूफ हैं हम रावण को राम ने मारा नारी की मर्यादा की खातिर नारी का शील हनन करने में लेकिन मशरूफ है हम नन्हें कर्णधार…

  • पॉलिटिकल लव- मोहब्बत में लाठी चार्ज करोगे?

    पॉलिटिकल लव- मोहब्बत में लाठी चार्ज करोगे?

    तुम न, आज कल कुछ भी बोलने लगे हो। अरे मेरी जान!  लगता है BHU के VC की आत्मा मेरे अंदर आ गई। बस आत्मा ही आये, हरकत नहीं आनी चाहिए।   तुम न ज्यादा घूमा मत करो। अच्छा जी। कभी खुद को देखी हो दिन भर पार्टी करती रहती हो। यहाँ मन की बात…

  • बेटियों पर लाठी चार्ज कर, बेटी बचा रहे हैं बीएचयू के वीसी

    21 सिंतबर को शाम क़रीब 6 बजे के आसपास भारत कला भवन के सामने एक लड़की के साथ कुछ मनचले छेड़छाड़ करते हैं। लड़के बदतमीज़ी की सारी हदें पार कर जाते हैं। लड़की के कपड़ों के अंदर हाथ डालते हैं। लड़की चिल्लाती है। सुरक्षा गार्ड पास में होते हैं पर लड़की की चीख़ सुनकर भी…

  • जनवादी पत्रकारिता को तिलांजलि दे चुकी है मेन स्ट्रीम मीडिया

    जनवादी पत्रकारिता को तिलांजलि दे चुकी है मेन स्ट्रीम मीडिया

    गुज़रा महीना समाचार और ख़बरों के बाज़ार के लिए बड़ा सीजन रहा क्योंकि साल का सबसे बड़ा ख़ुराक मीडिया को गुरमीत रामरहीम के नाम पर मिला. बहुत सारे पत्रकारों को ग्राउंड रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला और रिटायर होने के बाद अपने बच्चे और पत्रकार बनना चाह रहे बच्चों को सुनाने योग्य कहानी भी मिल…