इंसाफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चलके ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्ही हो कल के या नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं […]
Author: अनुराग अनुभव
फ़िल्म रिव्यू: कड़वी हवा, जिसकी कड़वाहट को समय रहते महसूस किया जाना चाहिए
‘कड़वी हवा’, पर्दे पर बंजर का एक ऐसा मंज़र है, जिसके सूखे को आप अपनी आंखों से तर कर देना चाहते हैं. फ़िल्म में संजय […]
मैं पूजा नहीं कर रही थी, एक बच्चे को प्यार कर रही थी- इस्मत चुग़ताई
ज़ंजीर कोई भी हो, अगर टूटेगी तो आवाज़ होगी. साहित्य और अदब में भी जब कभी कोई ज़ंजीर टूटती है, आवाज़ होती है. आवाज़ धीरे-धीरे […]
मासूमों के कत्लों पर आपके मन में सवाल नहीं उठता?
बीते हफ़्ते की दो घटनाएँ, बक्सर के डीएम मुकेश पांडे की आत्महत्या और गोरखपुर में 60 से ज़्यादा बच्चों की मौत. इन घटनाओं ने हमारे […]
मजबूरी में इन्हें घर कहना पड़ता है, मगर हैं ये ‘इंसानी पिंजरे’ ही
इंसानों की तेज़ी से बढ़ती आबादी का असर दुनिया के तमाम हिस्सों में दिखने लगा है. आए दिन जनसंख्या विस्फ़ोट के ख़तरों पर तमाम चर्चाएं […]