Author: एडिटर
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‘मेरे पास मां है’- सिनेमा जब तक रहेगा, ये शब्द गूंजते रहेंगे
साल 1951, फिल्म थी आवारा, राज कपूर के बचपन का रोल निभाते हुए एक छोटा सा बच्चा स्कूल मास्टर से कहता है, ‘मास्टर साहब ये ब्रश है और ये पॉलिश है, मैं बहुत अच्छा बूट पॉलिश करता हूं’ उसी फिल्म में वो एक रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खाता है और अंत में रोटी…
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जन्मदिन विशेष: भारत के पहले राष्ट्रपति जिन्हें नेहरु ने कभी राष्ट्रपति नहीं समझा
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का वह दौर जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफत का दूसरा नाम महात्मा गांधी था, उस दौर में अपने-अपने क्षेत्र के बहुत से प्रतिष्ठित लोगों ने महात्मा गांधी के नाम पर अपने नौकरी पेशे को त्यागकर आन्दोलन की मुख्य धारा में खुद को झोंक दिया था. डॉ राजेंद्र प्रसाद उसी में से एक…
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क्रिकेट के ‘मॉडर्न मास्टर’ बन चुके हैं विराट कोहली
भारतीय क्रिकेट के जोंटी रोड्स कहे जाने वाले मोहम्मद कैफ का दो दिन पहले जन्मदिवस था. उनके जन्मदिवस के ठीक एक दिन बाद श्रीलंका के खिलाफ तीसरे टेस्ट के पहले दिन कोहली ने एक और शतक मारा. कोहली का ये लगातार तीसरा शतक था. शतक के तुरंत बाद कैफ का एक ट्वीट आता है, जिसमें…
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बर्थडे स्पेशल: क्या सचिन तेंदुलकर को भी पीछे छोड़ देंगे विराट कोहली?
कुछ साल पहले विश्व क्रिकेट में यह बहस शुरू हुई थी कि सचिन तेंदुलकर महान हैं या सर डॉन ब्रेडमैन महान हैं. दोनों की खूब तुलना की गई. फिर सचिन की तुलना वेस्टइंडीज के महान प्लेयर ब्रायन लारा से की जाने लगी कि कौन महान है. उस दौर से शुरू हुई सचिन की तुलना आज…
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बर्थडे स्पेशल: उस्ताद नुसरत फतेह अली खान
अगर मौसिकी में सूफी कलाम और कव्वालियों को शामिल ना किया जाए तो संगीत का पूरा ताना बाना अधूरा सा लगने लगेगा. पिछले कुछ समय से एक गीत को कई तरीके से बदल बदल कर गाया जा रहा है. कहीं उसका रीमिक्स चल रहा होता है, तो कहीं किसी फिल्म में वही गीत नए तरीके…
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दिल्ली वालों, पटाखा बिना दिवाली कैसे मनी?
ये तस्वीर दिल्ली के दिवाली के बाद की है। जैसे हर त्यौहार पूरे देश में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है, वैसे ही दिवाली भी पूरे देश में अलग अलग तरीके से मनाई जाती है। उत्तर भारत खासकर यूपी बिहार के गांवों में खिलौने वाली मिठाई अनिवार्य होती है। घी के दिए अनिवार्य होते…
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बर्थडे स्पेशल: वो रेखा जो दोबारा खींची नहीं जा सकेगी
रेखगणित में सबसे आसान सीधी रेखा होती है किंतु उस रेखा को खींचना सबसे कठिन होता जिसमें उतार चढ़ाव ज्यादा हो। भानु रेखा गणेशन भारतीय सिनेमा की वही रेखा है, जिसे दोबारा खींचना शायद ही मुमकिन हो। यश चोपड़ा को हिंदी सिनेमा का महीन कारीगर कई मायनों में कहा जाता है। साल 1981, फिल्म सिलसिला।…
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हम अपनी नाकामी फतवा के पीछे क्यों छुपा रहे हैं?
अभी इस साल में काफी दिन बाकी हैं फिर भी इस साल की भारतीय उपलब्धियों की सूची उठाकर देखें तो हमेशा की तरह सूची में आधे से ज्यादा नाम आधी आबादी की नुमाइंदगी करने वाली लड़कियों या महिलाओं के हैं. चाहे हाल ही की कोई घटना उठा लें या चार पांच महीने पहले की कोई…