प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।

क्या महिलाएं युद्ध का कारण हैं?

आज सुबह मैं पार्क में व्यायाम करने के उपरांत कुछ देर सुस्ताने के लिए बैठ गया। वहां कुछ बुजुर्ग पुरुष महिलाओं के विषय में चर्चा […]