1933 के वक्त के भारत की बात करें तो आजादी का संग्राम और देशभक्ति से ओत-प्रोत साहित्य अपने पूरे उफान पर था। ऐसे माहौल में […]
Category: साहित्य
हैप्पी बड्डे: फिराक गोरखपुरी साहब
हर किसी की जिंदगी के समानांतर एक और जिंदगी होती है और यह सबको दिखाई नहीं देती । यह जिंदगी का एक दूसरा रंग होता […]
गुनाहगार हूं तुम्हारे माथे पर होठों से चांद बनाने का
लो बना दिया तुम्हारे माथे पर चाँद जो तुम्हारी हसरत थी नहीं जानता कि यह प्रेम है या प्रेम में लिपटी हवस जो मैं बार-बार […]
आपस में क्यों बैर करें सब?
हाथ एक से पांव एक से शहर एक से गांव एक से, एक सा चेहरा , एक सी सोच एक ही जीवन एक ही खोज, […]