Category: नेशनल
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नागरिकता कानून: शरणार्थियों के प्रति दया नहीं यह ख़ालिस राजनीति है
बहुमत के दम पर मोदी सरकार ने एक और मनमानी कर डाली है। नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 अब कानून बन गया है। लोकतंत्र में मजबूत सरकार का नुकसान क्या है, यह हमें देखने को मिल रहा है। इससे पहले इंदिरा गांधी को भी मजबूत सरकार मिली थी। इंदिरा और संजय गांधी ने भी जमकर ‘मजबूत…
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गरीब, मजदूर-किसान के बच्चों का IIMC आना सख्त मना है
पढ़ाई महंगी होगी, तो लोग अनपढ़ रहेंगे. लोग अनपढ़ रहेंगे तो कुपढ़ बनेंगे. कुपढ़ बनेंगे तो देश चौपट होगा.
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इंटरव्यू: पढ़ें, कट रहे जंगलों पर क्या है पेड़ों का कहना
आज हम जिनकी बात करने जा रहे हैं, शायद कल हमारी आने वाली पीढ़ी उन्हें बस इंटरनेट पर ही देख पाएगी। जिनकी आज बात करने जा रहे हैं, वो इतने खास हैं कि पृथ्वी उनके बिना आपने आप को अधूरा मानती है। और उनके लिए अपनी पृथ्वी एक गाना गाती है ‘मैं रहूँ या ना…
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कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कहीं पार्टी को खत्म न कर दे
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदउद्दीन ओवैसी की बात ठीक ही लग रही है कांग्रेस पार्टी राजनीतिक धरातल से साफ हो चुकी है और इसे कैल्शियम का इंजेक्शन देने बाद भी पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता.
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IT अधिकारी का आरोप- CBDT चीफ ने कहा- विपक्षी नेता पर रेड डालने के बाद मेरी कुर्सी सेफ है
पूंजीपतियों के दम पर हासिल की गई सत्ता अकसर उनकी गुलामी करती रहती है। नैतिक, अनैतिक हर तरह की छूट पूंजीपतियों को हासिल होती है। कानून अगर इन ‘आकाओं’ पर हाथ डालने की कोशिश करता है तो दूसरा ‘कानून’ उन्हें बचाने की कोशिश करने लगता है। ऐसे ही कुछ आरोप सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस…
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किसका है डर, जो गौतम नवलखा केस छोड़ रहे हैं ‘मी लॉर्ड’?
सामाजिक कार्यकर्ता और नक्सलियों से संपर्क रखने के आरोपी गौतम नवलखा की याचिका ने सुप्रीम कोर्ट के छक्के छुड़ा दिए हैं। न्याय व्यवस्था को ‘सुचारु’ रूप से चलाने बैठे सुप्रीम कोर्ट के जज इस मामले की सुनवाई से पीछे हट रहे हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत कुल 5 जज अबतक सुनवाई से हट चुके…
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युद्ध अपरिहार्य न हो तो गांधी वक़्त की ज़रूरत हैं
भारत में किसी की भी सरकार आए……गांधी को पूजना उसकी मजबूरी है, लेकिन उनके सिद्धातों को अपनाना नहीं. कोई अपना भी नहीं सकता. गांधी आदर्श स्थिति हैं.
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भारत के लिए शांति, पाकिस्तान के लिए परमाणु बम है प्राथमिकता
अगर हम गौर करें तो पाकिस्तान के साथ भारत का रुख बंटवारे के बाद से एक जैसा रहा है. जब कांग्रेस की सरकार रही तब भी, जब गैर कांग्रेसियों की रही तब भी. मनमोहन सिंह भी पाकिस्तान के लिए उतने ही बुरे थे, जितने नरेंद्र मोदी हैं.


