Category: विशेष
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तमिल राजनीति में शुरू होगा ‘थलाइवा’ का ‘सियासी शो’
सुपरस्टार रजनीकांत ने अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने की घोषणा कर दी है. जयललिता के रहते एकदम शांत और एकछत्र राज के तहत चल रहा तमिलनाडु जयललिता की मौत के बाद से एकदम अशांत हो चला था. पहले शशिकला का खुद को उनकी असली उत्तराधिकारी बताकर पार्टी और सरकार पर कब्जा और फिर नाटकीय रूप…
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पुण्यतिथि: अवधी का वह कवि जिसने अज्ञेय से मिलने से मना कर दिया
गांव से ताल्लुक रखने वाले लोग कथरी (गुदड़ी) को खूब समझते होंगे। हमारी और हमारे पूर्वजों को बचपन में फोम और रूई के गद्दे नहीं मिला करते थे बल्कि पुराने कपड़ों को ही रीसाइकिल करते हुए, उनसे एक बिस्तर नुमा कथरी बनती थी। मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि जिनका जिक्र आज यहां…
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नौशाद अली: कभी फुटपाथ पर सोने वाला बन गया संगीत का जादूगर
भारतीय सिनेमा का एक दौर ऐसा भी था, जब फिल्में संगीत प्रधान हुआ करती थीं, यानि फिल्में अपने गीत और संगीत की वजह से सुपरहिट हो जाती थीं. उस दौर के संगीतकारों की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन नौशाद अली के संगीत की बात ही कुछ अलग थी. हिंदी सिनेमा में जिन लोगों को संगीत का…
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अटल बिहारी वाजपेयी: राजनीति का एक अमर अजातशत्रु
अटल बिहारी वाजपेयी, अगर मैं कहूं कि नाम ही काफी है, तो सच नाम ही काफी है मेरे लिए. मेरा कोई नायक नहीं है जिससे प्रेरणा लेकर कुछ करने का हौंसला मिलता हो. ऐसा नहीं है कि कोई नायक नहीं है, दरअसल ये समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं. नब्बे के दशक में…
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श्रीनिवास रामानुजन: गणितीय इतिहास की सबसे अबूझ पहेली
विश्व इतिहास पर यदि नजर डालें तो कुछ नाम ऐसे आएंगे जिन्होंने बेहद कम समय में अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया हो. 22 दिसम्बर 1887 को भारत के चेन्नई में जन्में श्रीनिवास रामानुजन ऐसे ही एक विलक्षण प्रतिभा के थे जिन्होंने 32 वर्ष की अल्पायु में दुनिया को विदा कहने से…
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बता मेरे देश भगत सिंह वाली आज़ादी कब आएगी?
जो उजाला उसके सिर पर है, वह उसके जीवन में कब आएगा? बता मेरे देश वह गांधी का सपना कब पूरा हो जाएगा? जो देख रहा है उजाले को वह कब उसमें जी पाएगा? बता मेरे देश लोहिया का समाजवाद कब पूरा हो जाएगा? जो दिखा रही है रोशनी, उसके जीवन में कब सुनहरा पल…
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बहनों और भाइयों, मैं आपका दोस्त अमीन सायानी बोल रहा हूं…
तनु वेड्स मनु फिल्म के बिल्कुल शुरुआत में ही एक रेडियो में फरमाइशी कार्यक्रम चल रहा होता है जिसमें यह आवाज आती है, “बहनों और भाइयों नमस्ते, मैं आपका दोस्त अमीन सायानी बोल रहा हूं. स्वागत है आपके अपने ही फरमाइशी प्रोग्राम में. दोस्तों आज तो बहुत ही अच्छे-अच्छे और प्यारे गीतों की फरमाइशें आई…
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जो वह बेच रहा था, वह उससे ही दूर था
जो वह बेच रहा था, वह उससे ही दूर था, अब याद आ रहा है, मार्क्स का वह अलगाववाद जो उसके बहुत करीब था। वह ना जाने कब उस तक पहुंच पाएगा, जो वह बेच रहा वह उसको कब खरीद पाएगा? अब याद आ रहा है, कि लोहिया के समाजवाद से वो कितना दूर था।…
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‘मेरे पास मां है’- सिनेमा जब तक रहेगा, ये शब्द गूंजते रहेंगे
साल 1951, फिल्म थी आवारा, राज कपूर के बचपन का रोल निभाते हुए एक छोटा सा बच्चा स्कूल मास्टर से कहता है, ‘मास्टर साहब ये ब्रश है और ये पॉलिश है, मैं बहुत अच्छा बूट पॉलिश करता हूं’ उसी फिल्म में वो एक रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खाता है और अंत में रोटी…
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जन्मदिन विशेष: भारत के पहले राष्ट्रपति जिन्हें नेहरु ने कभी राष्ट्रपति नहीं समझा
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का वह दौर जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफत का दूसरा नाम महात्मा गांधी था, उस दौर में अपने-अपने क्षेत्र के बहुत से प्रतिष्ठित लोगों ने महात्मा गांधी के नाम पर अपने नौकरी पेशे को त्यागकर आन्दोलन की मुख्य धारा में खुद को झोंक दिया था. डॉ राजेंद्र प्रसाद उसी में से एक…