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सब राहों के अन्वेषी बचे-खुचे जंगलों के साथ ही कट गये
अब नहीं हैं प्रणययार्थी, न उनकी गणिकाऐं, वो गदिराए बदन भी नहीं हैं जिनपर लिख सको कामसूत्र जैसा ग्रंथ
तुम ज्ञान के लिए यात्राएँ क्यों करोगे जब तुम्हारे हाथ में किताबें हैं जिनमें लिखे हैं यात्राओं के विवरण
मैं पेट्रोल बोल रहा हूं, तुम मेरा दर्द सुनोगे?
मैं कोई और नहीं पेट्रोल बोल रहा हूं। आप मुझे रोज कोसते हैं, रोज गालियां देते हैं कि मैं महंगा…
इंटरनेट डकैती: रकम देने के बाद भी पिंड ना छोड़ने वाला भूत
पुराने जमाने में डकैती या चोरी कैसे होती थी? घोड़े पर विराजमान होकर अपराध जगत के देवता लोग आते थे…
