बर्थडे स्पेशल: फुटबाल को शिखर पर लाने को बेताब सुनील छेत्री

भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री का एक वीडियो अभी हाल ही में काफी चर्चित रहा। उन्होंने भारतीय फुटबॉल टीम को सपोर्ट करने के लिए एक भावुक अपील की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं थीं।

सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, सानिया मिर्जा जैसे खिलाड़ियों ने सुनील छेत्री का समर्थन किया वहीं कुछ खेल प्रेमी ऐसे भी थे जिनको सुनील छेत्री कि अपील नागवार गुजरी। उन्होंने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया। हालांकि ऐसे लोग मुट्ठी भर ही थे।

सुनील छेत्री ने कहा था कि, ‘हमें गालियां दो, आलोचना करो लेकिन भारतीय फुटबॉल टीम को खेल देखने स्टेडियम में आओ’ खास बात यह है कि सुनील छेत्री ने ये अपील तब की थी जब फीफा वर्ल्ड कप शुरू होने वाला था और कुछ टेलीवीजन प्रसारक भारतीय फुटबॉल प्रेमियों से हैशटैग के जरिए ‘दूसरे देशों’ के प्रति अपना प्रेम जाहिर करने की अपील कर रहे थे।

 

‘हमें गालियां दो, आलोचना करो लेकिन भारतीय फुटबॉल टीम को खेल देखने स्टेडियम में आओ’

दरअसल, यह समझना जरूरी यह है कि सुनील छेत्री ने ऐसी अपील क्यों की थी। भारत में इतने सालों से फुटबॉल खेला जा रहा है, लेकिन जैसी लोकप्रियता भारत में क्रिकेट को मिली है वैसी फुटबॉल और अन्य खेलों को नहीं मिली है। इसके बावजूद भी सुनील छेत्री इस मुकाम पर पहुंचे हैं और भारतीय फुटबॉल टीम की अगुवाई कर रहे हैं। उन्हें बेहतर पता है कि यहां तक पहुंचने में उन्हें कैसा सफर करना पड़ा है।

आज वे 34 साल के हो रहे हैं। उन्होंने हाल ही में उन्होंने अपना 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला है। भारत की ओर से सुनील छेत्री सबसे ज्यादा गोल दागने वाले खिलाड़ी हैं। पूर्व भारतीय कप्तान बाइचुंग भूटिया के बाद सुनील छेत्री अपने प्रदर्शन के दम पर भारतीय फुटबॉल की कमान अपने कंधों पर थाम रखे हैं।

शौकिया फुटबॉल खेलने के बाद उनके करियर की शुरुआत साल 2002 में हुई थी जब 17 साल की उम्र में उन्हें मोहन बागान के लिए साइन किया गया था। भारतीय टीम के लिए उनकी शुरूआत साल 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ हुई थी। तब से लेकर अभी तक सुनील छेत्री लगातार भारतीय टीम के लिए बेहतरीन खेल दिखा रहे हैं।

सुनील छेत्री बीच-बीच में कई कार्यक्रमों में अपनी इस यात्रा के संघर्षों के बारे में बताते रहे हैं। वे बच्चों के माता-पिता से भी फुटबॉल के लिए भावुक अपील कर डालते हैं। कभी-कभी भारत में फुटबॉल सिस्टम की तरफ इशारा भी करते हैं लेकिन वे कभी भी किसी और खेल से फुटबॉल की तुलना नहीं करते। उनका मानना है कि देश जैसे अन्य खेलों में आगे जा रहा है वैसे फुटबॉल में भी आगे जाएगा तो देश का ही नाम होगा।

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