फोर्टिफाइड चावल

Fortified Rice: पोषण सुधारने वाला ये चावल कैसे बनता है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को ऐलान किया कि अब राशन की दुकानों और मिड डे मील में दिए जाने वाले चावल को और पोषक बनाया जाएगा. इसके लिए उस चावल में कई सारे विटामिन और दूसरे ज़रूरी तत्व मिलाए जाएंगे. ये बिल्कुल वैसा है, जैसे साधारण नमक में आयोडीन मिलाकर उसे आयोडीन युक्त नमक बनाया जाता है. लक्ष्य ये है कि भारत में कुपोषण और भुखमरी को कम किया जाए. साथ-साथ लोगों को बीमार होने से बचाया जा सके और उनकी सेहत सुधारी जा सके.

फोर्टिफिकेशन क्या होता है?

ये एक ऐसा प्रक्रिया है, जिसमें चावल में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जाती है. जिससे यह चावल खाने वाले को इसका पूरा फायदा मिल सके. इसमें माइक्रो न्यूट्रिएंट मिलाए जाते हैं. जिससे लोगों के शारीरिक विकास में मदद मिल सके. 

चावल में पोषक तत्व बढ़ाने के कई सारे तरीके होते हैं. भारत में जो तरीका इस्तेमाल होता है, उसे एक्सट्रूजन बोलते हैं. इसमें, एफआरके यानी फोर्टिफाइड राइस कर्नल्स का उत्पादन किया जाता है. इसी एफआरके को सामान्य चावल में मिला दिया जाता है और फोर्टिफाइड चावल तैयार हो जाता है.

कैसे बनता है Fortified Rice?

इसमें सूखे चावल के आटे में माइक्रोन्यूट्रिएंट वाला पाउडर मिला जाता है. एक किलो चावल में लगभग 10 ग्राम पाउडर के हिसाब से. इसमें पानी मिलाकर एक  मशीन में डाला जाता है. ये मशीन इस पाउडर से फिर से चावल बना देती है. यही चावल ठंडा करके सुखा लिया जाता है और पैक कर लिया जाता है. इसे 12 महीने तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है. 

भारत सरकार ने इस तरह से बनने वाले चावलों के बारे में नियम तय किया है कि इनका आकार आम चावलों जैसे होना चाहिए. इसकी लंबाई 5 मिलीमीटर और चौड़ाई 2.2 मिलीमीटर हो सकती है.

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ये सब करने की ज़रूरत क्यों है?

भारत में कुपोषण बड़ी मात्रा में है. बच्चों और महिलाओं, खासकर गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की समस्या खासतौर पर देखी जाती है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स के 107 देशों में भारत 94वें नंबर पर है. इसका मतलब है कि बहुत बुरा हाल है.

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भारत सरकार ने जो मानक तय किए हैं, उसके मुताबिक, एक किलो चावल में 10 ग्राम माइक्रोन्यूट्रिएंट मिलाए जाएंगे. इसमें आयरन, फोलिक एसिड, कई तरह के विटामिन और ज़िंक जैसी ज़रूरी चीजें मिलाई जा सकती हैं.

कब से मिलेगा Fortified Rice?

आने वाले दिनों में चावल की मिलों में ये चावल तैयार होने लगेंगे. उनमें माइक्रोन्यूट्रिएंट मिलाने पर एक किलो के पीछे 60 पैसे का खर्च है. यह खर्च मिलों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा. केंद्र सरकार के मुताबिक, 6 राज्यों में पहले से ही इस तरह के चावल दिए जा रहे हैं और सितंबर से चार और राज्य इसे शुरू करने वाले हैं.

इन चावलों को पहचानने के लिए उनके बोरे पर +F का लोगो बना होगा और उन पर लिखा भी होगा कि इसे फोर्टिफाइड किया गया है. इस तरह के चावलों को बनाने या धोने के लिए किसी भी अलग तरीके की ज़रूरत नहीं है. आप सामान्य चावल की तरह इसे भी पका और खा सकते हैं. 

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