महिलाओं का खतना: छोटे से कट से बड़ा दर्द, क्या इसका भी कोई जवाब है?

खतना वो सच है जो आपके रौंगटे खड़े कर देगा। जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, उसकी मां या दादी मां उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं। बच्ची को ये नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है। दाई या आया या वो डॉक्टर उसके प्राइवेट अंग को के हिस्से काट देते हैं। इस प्रथा का दर्द ताउम्र उस बच्ची के साथ रह जाता है। इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला की यौन इच्छाओं को दबाना।

दुनियाभर में कम से कम 20 करोड़ लड़कियां या महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी योनि को खतने के नाम पर काट दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 2014 में 7 करोड़ लड़कियों का खतना किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले 15 साल तक यह तादाद तेजी से बढ़ेगी क्योंकि जनसंख्या बढ़ रही है।

खतने को लेकर एक जो वज़ह दी जाती है, वो ये है कि शादी से पहले लड़की वर्जिन रहे लेकिन लड़कियां क्या दर्द और क्या परेशानी झेलती हैं, वही जानती हैं। खतने से बीमारी का भी बहुत खतरा रहता है। खतने की वजह से बहुत ज्यादा खून बहता है और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। इनमें सिस्ट बनना, संक्रमण, बांझपन तो आम हैं ही, बच्चे के जन्म के समय जटिलताएं बढ़ जाती हैं और इसमें नवजात की मृत्यु का जोखिम बढ़ना भी शामिल है।

ये छोटा सा कट जिंदगी भर का गम और दर्द दे जाता है। लोग हरदम कहते हैं कि गरीब और पिछड़े लोग ही रूढ़िवादी परंपरा को मानते हैं लेकिन भारत में इसे मामने वाला समुदाय भारत के सबसे अमीर समुदाय में से एक है। इसे मानने वाला दाऊदी बोहरा मजबूत व्यापारी मुस्लिम समुदाय है। करीब 10 लाख लोग मुंबई और आसपास के इलाकों में रहते हैं। दक्षिणी मुंबई के मालाबार हिल इलाके में इनका मुख्यालय हैं।

भारत में, खासकर दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतने के खिलाफ आवाज उठाने वालीं मासूमा रानालवी कहती हैं, “वे हमेशा कहते हैं, छोटा सा कट है, बस मामूली सा कट है। छोटी सी बात है। लेकिन ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जहां ये छोटे से कट खतरनाक साबित हुए हैं।” रानालवी इस पर पूरी तरह से बैन चाहती हैं।

क्या तलाक के बाद खतने के मुद्दे पर भी इंसाफ मिलेगा या मामला टल जाएगा क्योंकि इसमें वो लोग है जो सरकारों सीधा प्रभावित कर सकता है लेकिन उम्मीद की जाएगी सरकार छोटे से कट का बड़ा दर्द समझेगी!

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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