राम चाहते हैं कि 21वीं सदी में उनके ‘भक्त’ उन्हेंं भूल ही जाएं!

राम बहुत दुखी हैं. उनके खुश रहने का अधिकार उनके भक्तों ने छीन लिया है. राम का मन कर रहा है एक बार फिर खुदकुशी कर लें और भारत से अपना-रिश्ता नाता तोड़ लें. वे चाहते हैं कि असमय अवतार लें और चीख-चीख कर कह दें, सुनो भारतीयो! तुम न तो हमारे भक्त हो, न मैं तुम्हारा भगवान बनना चाहता हूं. तुमने मेरे नाम पर कइयों की हत्या की है जिसका पाप मेरे मत्थे चढ़ रहा है. मुझे शर्मिंदगी है, मेरे होने पर.

राम लाचार हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह से भारतीय संविधान. कुछ नहीं कर सकते. लेकिन उनकी अवधारणा ऐसी आदर्श स्थिति की है, जिसके लिए हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं है. राम को लगने लगा है कि वे महज एक टूल बनकर रह गए हैं, भारत में. उनकी इससे इतर कोई सत्ता नहीं है.

राम सकते में आ गए थे जब देश का बंटवारा हुआ. राम-रहीम करते करते एक देश दो टुकड़ों में तबाह हो गया. एक को खतरा था कि बहुसंख्यक हिंदू आबादी मुस्लिमों को जीने नहीं देगी. एक पूर्वाग्रह की परिणति ऐसी हुई, जिसे भारत और पाकिस्तान अब तक झेल रहे हैं. झेलते रहेंगे.

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जिन्हें हिंद से प्यार नहीं था वे पाकिस्तान चले ही गए

भारत के मुसलमानों को खुद को हिंदू कहने वाले गुंडे आज भी कुछ भी गलत होने पर पाकिस्तान भेजना चाहते हैं. ध्यान रहे ये वही मुसलमान हैं, जिन्होंने अपनी इच्छा से देश में रहना स्वीकार किया था. उन्हें भारत से मोहब्बत थी. अपने जमीन से भी, जिसे वे नहीं खोना चाहते थे. लेकिन हिंदू-मुसलमान मरते रहे. आपस में उलझते रहे. उलझे रहे, दंगाई बनते रहे.

समय को साथ लोग सभ्य होते हैं, हमारे यहां बर्बर हो जाते हैं. जय श्री राम के नारे के साथ कट्टर हिंदुओं की भीड़ ने 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था. वहां राम मंदिर था या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है लेकिन जो नफरत है, वो दिख रही है. नफरत की खाई अब समंदर में तब्दील हो गई है.

जबरन वंदे मातरम से देशभक्ति नहीं मिलेगी

जय श्री राम, वंदे मातरम् का जबरन नारा लगवाया जा रहा है. क्या फर्क पड़ता है इससे. नारा लगवाने वालों को इससे स्वर्ग मिलेगा, या जिन्हें नारा लगवाकर मारा-पीटा जाता है उन्हें जन्नत नसीब होती है.

झारखंड के सरायकेला जिले में तबरेज अंसारी नाम के एक शख्स को बांधकर पीटा जाता है. शख्स को भीड़ घेर लेती है और यह श्री राम का नारा लगवाती है. सही वक्त पर इलाज न मिल पाने से तबरेज अंसारी की मौत हो जाती है. ‘राम’ की आत्मा तृप्त हो जाती है! लोग चाहते हैं कि अंत समय में राम का नाम जुबान पर आ जाए, यहां जय श्री राम का नारा लगवाकर अंसारी का अंत समय ला दिया गया.

कितना दुखद है, भक्ति के नाम, धार्मिक आस्था के नाम भीड़ के हाथों हत्या हो जाती है. भीड़ की चुनी गई सरकार ऐसी घटना पर मौन रहती है. उसे लगता है कि देश में सब ठीक है. हिंदू-मुस्लिम सब साथ मिलकर रह रहे हैं, सब कुछ अच्छा-अच्छा हो रहा है. नहीं, उसे भी लगता है कि सब कुछ हो रहा है. मॉब लिन्चिंग की घटनाएं देश में बढ़ी हैं. गाय राष्ट्रीय बहस का मुद्दा है. गाय के नाम पर किसी की जान ली जा सकती है. किसी को मौत के घाट उतारा जा सकता है. दलितों को बांधकर पीटा जा सकता है. नफरत इस हद बढ़ाई जा सकती है कि हर दाढ़ी वाला मुल्ला हमें आतंकी लग जाए. पाकिस्तानी लगे.

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ऐसे विश्वगुरु बनेंगे हम?

यह सब होता रहेगा. राम टुकुर-टुकुर देखते रहेंगे. स्वर्ग में भी उनकी आत्मा को सुकून नहीं है. बहुत दुखी हैं. गांधी का रामराज्य लिंचिंग राज्य के काफी करीब जा रहा है. बदला इंसान की प्रवृत्ति है. जिस दिन मुसलमान को मौका मिला, हिंदू को मारकर बदला पूरा करेगा. जिस दिन हिंदू को मौका मिला मुसलमान की पीट-पीटकर हत्या होगी. और इस तरह से हर दिन हम अपने सहिष्णु होने का प्रमाण देंगे. चिल्लाएंगे कि हम विश्व गुरु हैं. हमारे यहां की तहजीब सबसे अच्छी है. यहां हिंदू-मुस्लिम, सिख और ईसाई भाई-भाई की तरह रहते हैं. देश में रामराज्य है, लेकिन राम चाहते हैं कि इस देश में उनके बने हुए सारे मंदिरों को तोड़ दिया जाए, सारी मूर्तियां ध्वस्त कर दी जाएं क्योंकि उनके राम राज्य में उन्हें ही हत्यारा बनाया जा रहा है.

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