Trivendra singh rawat

त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे की वजह आखिर है क्या?

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देते वक्त रावत ने बताया कि यह पार्टी का फैसला है. खैर, होगा भी क्यों नहीं. जब पार्टी ने सीएम बनाया है, तो वही हटाएगी भी. कहा जा रहा है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत पर कई आरोप लगे हैं. पार्टी के कई विधायक और मंत्रियों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिसके बाद बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को यह फैसला लेना पड़ा. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में फजीहत से बचने के लिए पार्टी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को कुर्बान किया है.

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ऐसे मामलों में सवाल उठता है कि इसके कारण क्या थे? क्या त्रिवेंद्र सिंह रावत भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं? अगर ऐसा है, तो मामले की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए. अगर उनकी नेतृत्व क्षमता ठीक नहीं है, तो क्या केंद्रीय नेतृत्व को यह बात चार साल तक समझ ही नहीं आई? अगर ऐसा कुछ भी है तो क्या भारतीय जनता पार्टी की नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि वह जनता को भी इसका कारण बताए? क्या जनता को यह नहीं पता होना चाहिए कि ऐसी क्या नाकामियां रहीं कि सीएम बदला गया?

सिर्फ़ त्रिवेंद्र सिंह रावत ही जिम्मेदार या बीजेपी भी?

फिलहाल, बीजेपी में जो कल्चर है, उसके मुताबिक पार्टी की मुख्य नीति केंद्र से ही तय होती है. राज्यों के काम में भी पर्यवेक्षकों या प्रभारियों के जरिए सीधा हस्तक्षेप होता है. ऐसे में सिर्फ़ त्रिवेंद्र सिंह रावत को बलि का बकरा बनाने से क्या होगा? क्या जो कुछ कमियां थीं, वे सिर्फ़ और सिर्फ़ त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से ही थीं. या इस पाप में बीजेपी नेतृत्व भी बराबर का हिस्सेदार माना जाना चाहिए.

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जनता को फर्क़ पड़ता भी है या नहीं?

वैसे तो जनता को भी इससे फर्क़ नहीं पड़ता. अगर जनता सचमुच त्रिवेंद्र रावत से नाराज है, तो उसे उनके बदले जाने से ही संतोष हो जाएगा. सिर्फ़ श्वेत-श्याम देखने की हमारी कमजोरी का ही फायदा राजनीति उठाती है. नेता के गुण-दोषों और उसके काम-काज के हिसाब पर बात करना तो पूरी तरह से बेमानी ही है. अब अगले एक साल के लिए नया सीएम बनाया जाएगा. इसी की आड़ में चार साल के अच्छे-बुरे काम भुला दिए जाएंगे. जनता जब इस बीजेपी सरकार के काम पर वोट करने के बारे में सोचेगी तो त्रिवेंद्र के कार्यकाल को भूलकर अगले सीएम को ही देखेगी.

इस सबके बीच जो सवाल दफ़्न हो जाएगा, वह यही होगा कि आखिर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐसा क्या किया कि खुद बीजेपी ने ही उनसे इस्तीफा ले लिया.

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