मीडिया के विद्यार्थियों को बुलेट थियरी पढ़ाई जाती है। इसमें होता कुछ यूं है कि एक ही चीज आपको इतनी बार दिखा दी जाए कि […]
हर सरहद को तोड़ ही देगी आज़ादी…
हर सरहद को तोड़ ही देगी आज़ादी दुनिया भर को घर कर देगी आज़ादी. दिल में रह-रह मौज उठेगी आज़ादी जान तो इक दिन लेके […]
केरल प्लेन क्रैश: हादसे के बाद ही क्यों जागते हैं हम?
हादसों से घिरे हम भारतीय कुछ दिनों तक तो ढोंग करते हैं लेकिन पहले से तैयार नहीं रहना चाहते। मसलन केरल में हुए विमान हादसे […]
राफेल मिले, तकनीक नहीं… बड़े घाटे का सौदा है ये?
तकनीक ट्रांसफर न होने से भारत को इस सौदे में आर्थिक, रणनीतिक, सुरक्षा, तकनीक जैसे कई मोर्चों पर घाटा ही हुआ, यह साफ हो जाता है.
बहुत क्रूर और भयावह होता जा रहा है मीडिया का चरित्र
घटनाएं जितनी भयावह और वीभत्स होंगी, संपादकों के चेहरे पर उतनी ही प्यारी मुस्कुराहट तैरती नजर आएगी.
सब राहों के अन्वेषी बचे-खुचे जंगलों के साथ ही कट गये
अब नहीं हैं प्रणययार्थी, न उनकी गणिकाऐं, वो गदिराए बदन भी नहीं हैं जिनपर लिख सको कामसूत्र जैसा ग्रंथ
तुम ज्ञान के लिए यात्राएँ क्यों करोगे जब तुम्हारे हाथ में किताबें हैं जिनमें लिखे हैं यात्राओं के विवरण
ख़ुदकुशी…भवेश दिलशाद (शाद) की नज़्म
इसी इक मोड़ पर अक्सर गिरा जाता है ऊंचाई से अपनी ज़ात और ख़ाका मिटाया जाता है सब कुछ हो जिसमें ये सिफ़अत, क़ूवत कि जो अपना सके, जो घोल पाये सब कुछ अपने में
ग़मे-दिल और ग़मे जानां कहे बिन सह सके जो सब किसी इतनी बड़ी हस्ती के पहलू में किया जाता है सब कुछ गुम.
आर्टिकल 370 भी नहीं रहा, आखिर कब बंद होगी कश्मीरी पंडितों की हत्या?
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हो चुका है। रास्ते का रोड़ा माना जाने वाला अनुच्छेद 370 भी प्रभावी नहीं है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब केंद्र […]
कोरोना: क्या भारत में फिर से लॉकडाउन लागू करना पड़ेगा?
कोरोना कंट्रोल में नहीं है। हर दिन मामले बढ़ रहे हैं और लॉकडाउन फिर (again lockdown) से बढ़ने की आशंका भी। दिल्ली, मुंबई और कई […]
टीवी न्यूज ने कोरोना खत्म कर दिया है, जनता अपनी जान बचाए
मार्च का महीना था। कोरोना के डर से लोग कांप गए थे। पहले स्कूल-कॉलेज बंद हुए। दफ्तर बंद होने लगे। आखिर में रेल और हवाई […]