भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस यानी कांग्रेस पार्टी इस समय काई हो गई है। जो खुद तो शून्य दिख रही है लेकिन अच्छे-अच्छों को फिसला सकती है। […]
घुटता है दम-दम, घुटता है दम-दम, घुटता है दम-दम दिल्ली में
हमने विकास के लिए जिंदा शहरों को कब्रिस्तान में बदलने में की पूरी तैयारी कर ली है.
मोदी जी! टॉयलेट, अस्पताल, स्कूल…अर्थव्यवस्था..कुछ न चंगा सी
जहां प्राइमरी स्कूलों में लोग इसलिए लोग टीचर बनना चाहते हैं कि वहां आराम हैं, सरकारी नौकरी इसलिए लोग करना चाहते हैं क्योंकि वहां छंटनी का डर नहीं है…घूस है, पैसे हैं….वहां बेहतर सुविधाओं की उम्मीद भी करना पाप है.
अच्छे काम अगर भोंपू बजाकर भी हों तो ‘काम अच्छे हैं’
पब्लिसिटी जरूरी है अगर आप किसी भूखे हो खाना खिलाते हैं….किसी जरूरत मंद के लिए खड़े होते हैं…कोई आंदोलन कर रहे हैं….किसी को खून देने गए हैं….किसी के लिए लड़ रहे हैं….किसी को सुधार रहे हैं…..अगर सफाई भी कर रहे हैं…
इंटरव्यू: पढ़ें, कट रहे जंगलों पर क्या है पेड़ों का कहना
आज हम जिनकी बात करने जा रहे हैं, शायद कल हमारी आने वाली पीढ़ी उन्हें बस इंटरनेट पर ही देख पाएगी। जिनकी आज बात करने […]
आरे के बहाने: जंगल बचाने की लड़ाई इतनी सिलेक्टिव क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट ने आरे जंगल में पेड़ काटने पर फिलहाल रोक लगा दी है। लेकिन यह कोई खुश होने वाली खबर नहीं है। आरे में […]
कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कहीं पार्टी को खत्म न कर दे
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदउद्दीन ओवैसी की बात ठीक ही लग रही है कांग्रेस पार्टी राजनीतिक धरातल से साफ हो चुकी है और इसे कैल्शियम का इंजेक्शन देने बाद भी पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता.
आरे: विकास का रास्ता विनाश से होकर गुजरता है
मुंबई के आरे क्षेत्र में मेट्रो कार शेड बनना है. इसके लिए आरे के जंगलों के 2,700 पेड़ काटे जाने हैं. इन्हें लगाने में सदियां लग जाएंगी लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के महज 2 घंटे के भीतर मुंबई प्रशासन के लोगों ने 200 पेड़ काटकर गिरा दिए.
जारवा जनजाति: जहां गोरे बच्चे पैदा होने पर ले लेते हैं जान
विश्वभर में कई जनजातियां विलुप्तता की कगार पर हैं। अपने राज्यों के आस-पास के क्षेत्र में भी आपको बेहद ही कम जनजातियां दिखती होंगी। ऐसी […]
IT अधिकारी का आरोप- CBDT चीफ ने कहा- विपक्षी नेता पर रेड डालने के बाद मेरी कुर्सी सेफ है
पूंजीपतियों के दम पर हासिल की गई सत्ता अकसर उनकी गुलामी करती रहती है। नैतिक, अनैतिक हर तरह की छूट पूंजीपतियों को हासिल होती है। […]