जारवा

जारवा जनजाति: जहां गोरे बच्चे पैदा होने पर ले लेते हैं जान

विश्वभर में कई जनजातियां विलुप्तता की कगार पर हैं। अपने राज्यों के आस-पास के क्षेत्र में भी आपको बेहद ही कम जनजातियां दिखती होंगी। ऐसी ही जनजाति ‘जारवा’ के लोग आज भी बिना कपड़े के रहते हैं। खाने के लिए जानवरों का शिकार करते हैं। इनके पास जाने से ही इंसान डरता हैं।

जारवा जनजाति 55,000 साल पुरानी है। यह अंडमान निकोबार द्वीप समूह की जनजातियों में से एक है। इस जनजाति का संबंध नेग्रिटो समुदाय की जनजाति से है। वर्तमान में यह जनजाति मध्य अंडमान के पश्चिमी भाग और दक्षिण अंडमान के इलाके में रहती है।
1990 में ये पहली बार बाहरी दुनिया के संपर्क में आए लेकिन जारवां की संख्या अब मात्र 380 ही बची है। मतलब कि इस समुदाय के मात्र 380 व्यक्ति ही जिंदा हैं।

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जारवा जनजाति के लोग आज भी बिना कपड़े के रहते हैं लेकिन बीते कुछ सालों से लोगों के आवागमन के कारण ये अब नाम मात्र के कपड़े का उपयोग करने लगे हैं। ये कपड़ें इनके कुछ अंगों को ढकते हैं। ये झुंड में शिकार करते हैं। इनके पास शिकार के लिए भाले जैसे नुकीले हथियार हैं। जिससे ये जानवरों को मारकर उन्हें खाते हैं। कभी-कभी ये लोग मच्छलियों को भी पकड़ते हैं।

जारवा के लोग बच्चों को मार देते हैं

जारवा जनजाति के लोग अपने बच्चे के या कबीले के किसी भी बच्चे को मार देते हैं, अगर उसका रंग उनके रंग से अलग या गोरा हुआ। अगर कोई विधवा मां बन जाती है, तब भी ये होने वाले बच्चे को शक के आधार पर मार देते हैं। कुछ सालों पहले एक बच्चे को जमीन में दबाते हुए एक व्यक्ति ने देखा भी था। उसने इसकी शिकायत पुलिस से की लेकिन पुलिस इनके मामले में दखल नहीं देती है।

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जारवा के इलाके में कोई नहीं जा सकता

कोर्ट के द्वारा जारवा जनजाति के इलाके में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। इनके इलाके से गुजरने वाली गाड़ियों के लिए नियम है कि कई गाड़ियां एक साथ ही निकलती हैं और बीच में रुकने की अनुमति नहीं है। गाड़ी रोकना या शीशे खोलना भी मना है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इस रोड से टूरिस्ट्स के गुजरने पर रोक भी लगा दी थी लेकिन बाद में फैसले को बदलते हुए कोर्ट ने दिन में कुछ बार गाड़ियों के जाने की इजाजत दी थी। किसी भी जारवा को खाना देना या उनसे किसी भी तरह की बात करना, उनसे इशारे करना और उनकी फोटो लेना मना है। यह एक दंडनीय अपराध है।

SC & ST (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 2016 के सेक्शन 3(1) में यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति इस जनजाति के लिए आरक्षित क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रवेश करता है, उनकी तस्वीरें खींचता है, उनकी नग्न अवस्था का विडियो बनाता है तो उसको तीन साल की सजा और 10,000 रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

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जब खाने के लिए नाचीं जारवा की औरतें

एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसपर ‘ द गार्जियन’ ने 2014 में ही एक रिपोर्ट छापी थी। इसमें कहा गया कि कुछ बाहरी लोगों ने जारवा की महिलाओं के साथ यौन हिंसा भी की। इसका खुलासा तब हुआ, जब पहली बार किसी जारवा जनजाति ने पब्लिक इंटरव्यू दिया। महिलाओं को खाने का लालच देकर उनसे डांस कराया गया था, जिसें लेकर काफी किरकिरी हुई थी, बाद में कुछ ऐक्शन भी हुआ था।

तान्या त्रिपाठी

तान्या सामाजिक कार्यकर्ता हैं और महिलाओं के मुद्दों पर लिखती रहती हैं। इसके अलावा जन सरोकार के मुद्दों को लेकर लंबे समय से जमीन पर काम कर रही हैं।

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