साहित्य गुनाहगार हूं तुम्हारे माथे पर होठों से चांद बनाने का अमन गुप्ता August 16, 2017 1 लो बना दिया तुम्हारे माथे पर चाँद जो तुम्हारी हसरत थी नहीं जानता कि यह प्रेम है या प्रेम में लिपटी हवस जो मैं बार-बार […]