Posted in साहित्य गुनाहगार हूं तुम्हारे माथे पर होठों से चांद बनाने का Estimated read time 1 min read Posted on August 16, 2017October 11, 2017 by अमन गुप्ता लो बना दिया तुम्हारे माथे पर चाँद जो तुम्हारी हसरत थी नहीं जानता कि यह प्रेम है या प्रेम में…