प्रदर्शन को दर्शन में बदलने पर जो किक मिलता है न वैसा कहीं और नहीं मिलता. कुछ खास बात है प्रदर्शन में. प्रदर्शन की कला […]
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डरे हुए रवीश कुमार के लिए एक पत्रकार का खुला खत!
प्रिय रविश कुमार, आप एक क़ाबिल और सरोकारी पत्रकार हैं। आप गंभीरता से अपना काम करते हैं और आपकी कलम कमाल बरपा करती है। सच्चाई […]
न प्रेस कार्ड है, न प्रिंटिंग प्रेस, न नौकरी, फिर भी अखबार निकालता है यह पत्रकार
मुज़फ्फर नगर में एक पत्रकार ऐसा भी है जिसके पास न अपनी छपाई मशीन है, न कोई स्टाफ और न सूचना क्रांति के प्रमुख साधन-संसाधन। […]
ये इश्क़ तो नहीं है
इश्क़ का कॉन्ट्रैक्ट करोगे? सुनो! कहो! प्यार हुआ है कभी तुम्हें? हां! कई बार। और जिनसे तुमने प्यार किया, क्या उन्हें भी तुमसे प्यार था? […]