अगर हम गौर करें तो पाकिस्तान के साथ भारत का रुख बंटवारे के बाद से एक जैसा रहा है. जब कांग्रेस की सरकार रही तब भी, जब गैर कांग्रेसियों की रही तब भी. मनमोहन सिंह भी पाकिस्तान के लिए उतने ही बुरे थे, जितने नरेंद्र मोदी हैं.
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हर पड़ोसी भारत और भूटान की तरह क्यों नहीं होते?
कलह, खून, बम धमाके, शहादत, संघर्ष विराम का उल्लंघन और बमबारी. 70 सालों में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की यही उपलब्धि है.
पॉलिटिकल लव: सैंया रूठो मगर दुश्मन के दर न जाओ
तुम कोई फोटो क्यों नहीं खिंचवाते हो? अरे हमें पसंद नहीं है ये सब। अच्छा जी फिर फोटोग्राफी डे पर क्या डालोगे एफबी पर? तुम्हारे […]
पॉलिटिकल लव: प्यार की साइकिल जरा धीरे चलाओ पिया
तुम साइकिल चला लेते हो ? अरे बाबा मैं कहां चला पाता हूं, और तुम? मेरा भी तुम्हारे वाला हाल है। चलो सही है जिसको […]
‘कप्तान खान’ अगर ‘फौजी खान’ नहीं बने तो पाकिस्तान का बदलना तय!
पाकिस्तानी राजनीति का इतिहास उठा कर देखें तो सिर्फ गिने चुने नाम आएंगे जो जननेता के रूप में उठकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हो. और ये तय के अब उस इतिहास में इमरान खान का नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा