Tag: बीजेपी
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21 साल पुराना हादसा, जिसने दिल्ली को सिग्नेचर ब्रिज दिया
हादसे किसी भी तरह से अच्छे नहीं होते लेकिन यही हादसे कई बार अच्छी चीजों की नीव पड़ने की वजह बन जाते हैं। एक ऐसा ही हादसा दिल्ली में हुआ, जिसके 21 साल बाद दिल्ली में सिग्नेचर ब्रिज तैयार हुआ है। आप सोच रहे होंगे कि हादसे से भला सिग्नेचर ब्रिज का क्या कनेक्शन? दरअसल,…
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मिजोरम चुनाव: वोट नहीं देंगे ब्रू समुदाय के ‘भूखे’ लोग!
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। हालांकि, सबकी नजरें हिंदी भाषी राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर टिकी हुई हैं। इस बीच मिजोरम का चुनाव कई कारणों से लगभग उपेक्षित सा है। सबसे पहली बात तो यह है कि यहां विधानसभा सीटों की संख्या बेहद कम है। मात्र 40 विधानसभा सीटों वाले…
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कहावत ‘उड़ता तीर‘ लेने की थी पार्टियों ने ‘उड़ता जेट’ ले लिया
डिजिटल होती दुनिया और टेक्नोलॉजी के इस दौर में सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है. स्मार्टफोन के मॉडल से लेकर एंड्राइड OS इतनी तेजी से अपडेट हो रहे हैं. इतनी तेज़ी से तो घर के बच्चे भी बड़े नहीं होते. दस में से साढ़े नौ जेब में टुनटुनाने वाले शियोमी के स्मार्टफोन की…
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ब्रेकिंग: विवाद के बाद आया राफेल का पहला बयान
मैं राफेल बोल रहा हूं। हां मैं बोल सकता हूँ। मैं बोफोर्स दादा की तरह नहीं कि मैं सुनकर चुप हो जाऊं। मैं आपके देश के 2G या 3G की तरह भी नहीं हूं, जो बिना बोले सबको छोड़ दूं। मैं बोलूंगा और जोर से बोलूंगा, अगर आप सुन नहीं सकते तो अपने कान बंद…
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चंद्रशेखर ‘रावण’ को छोड़ना बीजेपी की चालाकी है या मूर्खता?
चंद्रशेखर रावण को तो आप जानते ही होंगे? वही भीम आर्मी वाले। वही भीम आर्मी जिसने दलितों को दम भरना सिखाना शुरू किया तो इसे बनाने वाले चंद्रशेखर को बीजेपी की सरकार ने रासुका कानून के तहत जेल में ठूंस दिया। अब बीजेपी को 2019 की कुर्सी हासिल करनी है तो दलितों पर विशेष प्रेम…
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…तो मोदी और केसीआर का रिश्ता फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स वाला है?
के. चंद्रशेखर राव ने अपने राजनीतिक अनुभव और चालाकी के हिसाब से सबसे धांसू चाल चली है। फौरी तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि केसीआर के नाम से चर्चित तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के मुखिया चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले-पहले विधानसभा जीत ली जाए। हालांकि, राजनीतिक दावपेंच समझने वाले मान रहे हैं…
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पॉलिटिकल लव: पेट्रोल के दाम सताएं तो कैलास चले जाओ
यार शादी के लिए कुछ सोचा है तुमने? क्या सोचना है कर लेंगे वक़्त आने पर। अच्छा अगर घर वाले नहीं माने तो? महाराष्ट्र वाले चाचा से मदद ले लेंगे। अच्छा ये बात नागपुर वाले फूफा को पता लगी न तो चाचा की खैर नहीं। अरे फूफा इन सब को कुछ नहीं बोलते बस सुनते…
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अटल बिहारी वाजपेयी को और कितना ‘बेचेंगे’ मोटाभाई और साहेब?
पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से एक अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद बीजेपी और नरेंद्र मोदी गुट को कुछ ज्यादा ही दुख हुआ। हालांकि, यही दुख उन्हें तब नहीं था, जब सालों से अटल बीमार पड़े थे और लगभग मृत ही थे क्योंकि न तो वह बोल…
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पॉलिटिकल लव: इश्क का बत्तख बाढ़ में उतारो पिया
यार यहाँ साँस लेने में दिक्कत हो रही है। अच्छा जाओ बतख वाले तालाब में। ठीक है असम की टिकट कराओ फिर। क्यों तुम्हारे यहाँ बतख नहीं है क्या ? बतख तो है पर ऑक्सीजन वाली सिर्फ असम में ही मिलेगी। तुम्हें एक बात बताएं GDP के बारे में। हां बताओ मेरी जान क्या…
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क्या विपक्ष के पास मोदी विरोध के अलावा कोई नीति भी है?
2019 के चुनाव से पहले तमाम पार्टियां इकट्ठी होती दिखाई पड़ रही हैं। सबका सिर्फ एक उद्देश्य दिखाई दे रहा है, ‘मोदी को हराना’। गजब मसला है कि पूरा का पूरा चुनाव सिर्फ इस बात पर लड़ा जाने वाला है कि मोदी चुनाव हारेंगे या मोदी चुनाव जीतेंगे, इसमें फायदा किसी का भी हो लेकिन…