राम लाचार हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह से भारतीय संविधान. कुछ नहीं कर सकते. लेकिन उनकी अवधारणा ऐसी आदर्श स्थिति की है, जिसके लिए हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं है.
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पॉलिटिकल लव: प्यार की साइकिल जरा धीरे चलाओ पिया
तुम साइकिल चला लेते हो ? अरे बाबा मैं कहां चला पाता हूं, और तुम? मेरा भी तुम्हारे वाला हाल है। चलो सही है जिसको […]
मॉब लिंचिंग: सारे जहां से अच्छा यह गउसितां हमारा!
सारे जहाँ से अच्छा ये गऊसितां हमारा, लगता है दुश्मन हमको यहाँ हर मियाँ हमारा। खाती हैं कूड़ा कचरा मरती हैं रोड पर वो, हर […]
पॉलिटिकल लव: वॉट्सऐप से आप भी तो नहीं बन रहे ‘लिंच पुजारी’?
तुम जयपुर आए थे? हां आया तो था सोचा तुम से मिल कर जाऊंगा। अच्छा क्या पहन कर आए थे जी? अरे वो काला कुर्ता […]