कल तुम मुझे इग्नोर करके आगे क्यों चले गए? अरे वो दोस्त से मिलना था, तुम तो रोज ही साथ रहती हो, नहीं लग तो […]
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पॉलिटिकल लव: प्यार को सुप्रीम कोर्ट की तरह सीरियस लो
तुम इतने गोरे कैसे हो रहे हो? अरे घर पर रहने का यही फायदा है, मुझे लगा तुम भी मशरूम खाने लगे हो! अरे नहीं […]
6 दिसंबर 1992: उन्माद को नया रूप देने वाली एक तारीख
यहां मेरी बात पढ़कर अगर आप भी मुझे मुगल प्रेमी, हिंदू विरोधी, फर्जी सेकुलड़ या देशद्रोही जैसी उपाधियां देने दौड़े आते हैं तो सच कहता […]
क्या संस्कार की बजाय बलात्कार में बदल रहा है विवाह?
हमारे भारतीय समाज में विवाह को बहुत ही पवित्र माना जाता है, कहा जाता है विवाह दो आत्माओं, दो परिवारो का मिलन होता है लेकिन […]