क्या संस्कार की बजाय बलात्कार में बदल रहा है विवाह?

हमारे भारतीय समाज  में विवाह को बहुत ही पवित्र माना जाता है, कहा जाता है विवाह दो आत्माओं, दो परिवारो का मिलन होता है लेकिन जब ये संस्कार बलात्कार में परिवर्तित होता है तब क्या होता है? आइए इसके कुछ बिन्दुओ पर चर्चा करें।

सबसे पहले तो ये कि लोग शादी क्यों करते है? आप पूछेंगे जाहिर सी बात है कि संसार को आगे बढ़ाने के लिए इसका मतलब ये कि संसार को चलाने के लिए दोनों की ही जरूरत होती है।

दूसरा कि विवाह से समाजीकरण होता है, कई लोगो की जान-पहचान एक दूसरे से होती है और समाज मे isolationism समाप्त होता है।

 

तीसरा, विवाह  इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि हमेशा आपके दोस्त, आपके रिश्तेदार और माता-पिता आपके साथ नहीं रह सकते और आपको जब भी अकेलापन महसूस हो तो आप अपने साथी के साथ वक़्त बिता सकते है और एक दूसरे की तकलीफों और दुखों को समझकर दूर करने की कोशिश कर सकते है।

ये कुछ पहलू थे जिनकी वजह से विवाह होते है और होते भी रहेंगे, पर समाज में एक धारणा पता नहीं कब से बन गई कि शादी के बाद पति को पत्नी के साथ यौन समंध बनाने की अनुमति मिल जाती है। एक महिला कोई उपभोग की वस्तु नहीं फिर क्यों ऐसे मामले रोज अखबारों में पढ़ने को मिलते है कि पति के जबरदस्ती करने पर पत्नी ने की खुदकुशी या रिपोर्ट दर्ज कराई।

क्या हो समाधान

बाहर तो बलात्कार होते ही रहते हैं पर एक घर ही होता है, जहाँ महिला अपने को सुरक्षित महसूस करती है पर क्या हो जब घर में ही नरभक्षी हो उसकी आबरू को कुचलने वाला ही खुद उसके साथ रहता हो सर्वोच्च न्यालय ने 18 वर्ष की कम आयु की लड़की से संबंध बनाने पर ऐतराज जताया पर क्या 18 वर्ष से ऊपर की महिला में दिल नही होता, आत्मा नही होती, क्या उसे तकलीफ नहीं होती? क्या वो मानसिक और शारीरिक रूप से घायल नहीं होती? अगर नहीं होती तो सर्वोच्च न्यायालय ये सिद्ध करके दिखाए और होती है तो उसके लिए क्या कहता है आपका कानून ये भी बताए।

 


यह लेख प्रदीप कुमार ने लिखा है। प्रदीप दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के छात्र हैं।

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