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‘ये रंग होगा कितना गहरा कितना हल्का, ये अफसर तय करेंगे’
किसी का हुक्म है सारी हवाएं, हमेशा चलने से पहले बताएं, कि इनकी सम्त क्या है. हवाओं को बताना ये भी होगा, चलेंगी जब तो क्या रफ्तार होगी, कि आंधी की इजाज़त अब नहीं है. हमारी रेत की सब ये फसीलें, ये कागज़ के महल जो बन रहे हैं, हिफाज़त इनकी करना है ज़रूरी. और…
