आम भारतीय माँ-बाप जैसे ही अजीत वाडेकर के माँ-बाप भी अपने बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते थे। बेटे को लेकर बुने जा रहे अपने इन्हीं […]
Month: March 2018
भवानी प्रसाद मिश्रः जन्मदिन विशेष – ‘सतपुड़ा के घने जंगल’
अज्ञेय के दूसरे तारसप्तक के कवि भवानी प्रसाद मिश्र ने इस देश के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल तक के इतिहास को अपनी आंखों से देखा है।
क्या ममता दीदी, मोदी भइया का दिवाला निकालने में कामयाब हो जाएंगी?
नमस्कार मैं चकित पत्रकार! कुछ बातें हमारे कानों में चींटी की तरह हलती हैं और चुप्पी दाब के निकल जाती हैं. जब तक दिमाग कुछ […]
आखिर क्यों कंपकपा रही है भाजपा अध्यक्ष की जुबान?
बचपन में एक बार सुना था कि 24 घंटे में एक बार हर आदमी की जीभ पर सरस्वती बैठती हैं. उस वक्त वह सही कह […]
अन्ना हजारे का अनशन: इतिहास बनेंगे या इतिहास दोहराएंगे
अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन शुरू कर मोदी सरकार को ललकार दिया है. उनके अनुसार ये आंदोलन जनलोकपाल, किसानों की समस्याओं’ और चुनाव में सुधारों के लिए एक सत्याग्रह होगा
ईश्वर अगर नीरो या चंगेज खां है तो उसका नाश हो: भगत सिंह
भगत सिंह अपने लेख ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ में एक तरफ खुद के नास्तिक हो जाने के कारणों को बताते हैं और यह भी स्पष्ट […]
पॉलिटिकल लव: प्यार की रक्षा के लिए यज्ञ करोगे ?
तुम प्यार की रक्षा के लिए क्या करोगे? मैं भी लाल किले पर यज्ञ करूँगा। अरे! उससे क्या? बस एयर पॉल्यूशन ही बढ़ेगा, अरे! ऐसा […]
हरित क्रांति के नाम पर यूं कंपनियों के गुलाम बन गए किसान
देश में हर महीने 70 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं और ज्यादातर में आत्महत्या की वजह किसान पर बढ़ता कर्ज होता है। किसान […]
दुख हूं मैं एक नए हिन्दी कवि का, मुझे कहां बांधोगे किस लय, किस छन्द में?
जब भी हिंदी का कोई बड़ा स्तंभ डगमगाता है तो ऐसा कहा जाता है कि विराट शून्य हो गया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. सच भी है.
धीरे-धीरे भरोसा हो रहा है कि पार्लियामेंट में डकैत ही होते हैं
इरफान खान की फिल्म सामने चल रही थी, फिल्म में डायलॉग आता है, ‘ बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पाल्लियामेंट में।’ पान […]