…जब एक इंजिनियरिंग स्टूडेंट 3 रुपये के लिए क्रिकेटर बन गया

आम भारतीय माँ-बाप जैसे ही अजीत वाडेकर के माँ-बाप भी अपने बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते थे। बेटे को लेकर बुने जा रहे अपने इन्हीं […]

भवानी प्रसाद मिश्रः जन्मदिन विशेष – ‘सतपुड़ा के घने जंगल’

अज्ञेय के दूसरे तारसप्तक के कवि भवानी  प्रसाद मिश्र ने इस देश के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल तक के इतिहास को अपनी आंखों से देखा है।

क्या ममता दीदी, मोदी भइया का दिवाला निकालने में कामयाब हो जाएंगी?

नमस्कार मैं चकित पत्रकार! कुछ बातें हमारे कानों में चींटी की तरह हलती हैं और चुप्पी दाब के निकल जाती हैं. जब तक दिमाग कुछ […]

अन्ना हजारे का अनशन: इतिहास बनेंगे या इतिहास दोहराएंगे

अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन शुरू कर मोदी सरकार को ललकार दिया है. उनके अनुसार ये आंदोलन जनलोकपाल, किसानों की समस्याओं’ और चुनाव में सुधारों के लिए एक सत्याग्रह होगा

हरित क्रांति के नाम पर यूं कंपनियों के गुलाम बन गए किसान

देश में हर महीने 70 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं और ज्यादातर में आत्महत्या की वजह किसान पर बढ़ता कर्ज होता है। किसान […]

दुख हूं मैं एक नए हिन्दी कवि का, मुझे कहां बांधोगे किस लय, किस छन्द में?

जब भी हिंदी का कोई बड़ा स्तंभ डगमगाता है तो ऐसा कहा जाता है कि विराट शून्य हो गया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. सच भी है.

धीरे-धीरे भरोसा हो रहा है कि पार्लियामेंट में डकैत ही होते हैं

इरफान खान की फिल्म सामने चल रही थी, फिल्म में डायलॉग आता है, ‘ बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पाल्लियामेंट में।’ पान […]