इंटरव्यू: छेड़छाड़ और हैकिंग पर ये बोली EVM मशीन

नमस्कार, आपका स्वागत है लोकल डिब्बा पर। एक वक्त हुआ करता था, जब बटन वाले फोन होते थे और बैलेट पेपर वाले वोट लेकिन वक्त के साथ सब बदलता चला गया। फोन स्क्रीन टच हो गए और वोट ईवीएम से होने लगे। ईवीएम जी के आने के बाद एक नई क्रांति आई लेकिन कुछ वक्त के लिए क्रांति ठंडी पड़ गई और ईवीएम जी के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती चली गईं। वैसे तो हर बार ईवीएम जी चुनाव के बाद चर्चा में आती थीं लेकिन इस बार चुनाव के पहले से ही चर्चा में बनी हुई हैं। तो चलिए आज उनसे कुछ सवाल-जवाब करते हैं।

 

फलाने– नमस्कार ईवीएम जी, आपका स्वागत है लोकल डिब्बा पर।
ईवीएम-नमस्कार फलाने जी।

 

फलाने- इस बार चुनाव के नतीजों से पहले चर्चा में कैसे आ गईं आप?
ईवीएम- फलाने जी चर्चा में तो बहुत पहले से हूँ मैं। 2007 में तो किताब भी आ चुकी है मेरे ऊपर और सुनिए! मजे की बात यह है कि लिखने वाले सत्ता में बैठे हैं तो चर्चा बहुत पुरानी है मुझ पर लेकिन याद तब आती है जब अपने पर पड़ती है।

 

फलाने- आप पर आरोप है कि आप हाथ का साथ बिल्कुल नहीं दे रही हैं?
ईवीएम– ऐसा कुछ नहीं है, जब वो सत्ता में थे तो fool पार्टी मुझ पर आरोप लगाती थी कि मैं उनका साथ नहीं दे रही। इसी पर मैं एक बात बोलना चाहती हूं कि मैं हाथ और fool का नहीं बस सत्ता का साथ देती हूं। आप मेरी तरफ से दोनों को बता देना और बाकी ‘आप’ तो समझदार हैं ही।

 

फलाने- इस चुनाव में आपको सेफ रूम में रखा गया था, तब भी गड़बड़ हो गई कैसे?
ईवीएम– आप लोग भले 21वीं सदी में जी रहे हों लेकिन आपका दिमाग आज भी 18वीं सदी वाला ही है। टेक्नोलॉजी का जमाना है, अब हाथ से नहीं रिमोट से छेड़छाड़ हो रही है। लगता है आप न्यूज़ नहीं देखते!

 

फलाने– इतनी छेड़छाड़ पर आपको बुरा नहीं लगता?
ईवीएम– बुरा तो आपको लगना चाहिए क्योंकि ये छेड़छाड़ आपके कथित लोकतंत्र से हो रही है। मुझसे छेड़छाड़ कर वो आपके अधिकारों का मज़ाक बना रहे हैं और आप मुझसे पूछते हैं कि मुझे बुरा लगा या नहीं। बाकी छेड़छाड़ किसी के साथ भी हो, बुरा तो लगता ही है फलाने जी।

 

फलाने– आपका लैपटॉप भाईसाहब से क्या संबंध है?
ईवीएम– फलाने जी, हमारे संबंध तो आपकी fool पार्टी से भी बताए जाते हैं। अभी आप खुद इसी बात को बोल रहे थे। रही बात लैपटॉप जी की तो वो मेरी दूर की मौसी के लड़के हैं तो मेरा उनका संबंध बस दूर का है। हमारी तो बात भी बहुत दूर से होती है और हम दोनों दूर से ही जुड़े हुए हैं बस।

 

फलाने– सभी पार्टियां हार का ठीकरा आप पर ही क्यों फोड़ देती हैं?
ईवीएम– देखिए फलाने जी, वो सब कायर लोग हैं। वे हार की जिम्मेदारी नहीं ले सकते हैं। मैं मानती हूँ कि कई बार गड़बड़ी भी होती है लेकिन सारी बात मुझ पर ही छोड़ देते हैं। आपने कभी सुना है कि जीत के बाद मेरा शुक्रिया अदा किया हो किसी ने। फलाने जी आरोप लगाना सबसे आसान काम होता है, वे यही सब करते हैं।

 

फलाने– क्या आपको पता है कि आपको हटाकर बैलेट पेपर को लाने की बात चल रही है?
ईवीएम- ये लोग कुछ कर नहीं सकते। आज मुझे हटाने की बात कर रहे हैं, कल को बैलेट पेपर को भी हटा देंगे और सुनिए, सवाल तो पोस्टल बैलेट भाई साहब पर भी उठाए गए हैं। कितनों को हटाएंगे आप, हटाने से कुछ नहीं होने वाला, जो है उसमें सुधार करिए वो ज्यादा अच्छा होगा। आप मेरे भाई VVPAT को मेरे साथ जोड़िए, देखिए फिर क्या होता है। फलाने जी हमें बदलाव से ज्यादा सुधार की जरूरत है।

 

फलाने- आखिरी सवाल आपसे, आप हमारे पाठकों से क्या कहना चाहेंगी।
ईवीएम- अगर मुझ में कमी है तो आप भी आवाज उठाओ क्योंकि आज जो विपक्ष आवाज उठा रहा है, कल को सत्ता में आकर सबसे पहले वही चुप होगा। वोट देना आपका अधिकार है उसके लिए लड़िए। नेता की लड़ाई बस सत्ता में आने तक की है।

 

शुक्रिया ईवीएम जी, आपकी बातों ने हमारी आंखें खोल दीं और आपके साथ हो रही छेड़छाड़ का मुझे बहुत दुख है। मैं सरकार से आपके लिए बोलूंगा वो आपके लिए एक नारा तो कम से कम लाये ‘टेक्नोलॉजी बढ़ाएं, ईवीएम बचाएं’।

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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