पॉलिटिकल भक्ति: समयानुसार “जय श्री राम”

“जय श्री राम” बड़ा ही करिश्माई नारा है| सच में इसका उच्चारण करते ही “भक्तों” की छाती पूरे 56 इन्च फूल जाती है, जैसे किसी राष्ट्रवादी पम्प से हवा भर दी गई हो |
कितनी कमाल की बात है न!
लोग अपने सारे दुख, नोटबन्दी और जी0एस0टी0 की “सफ़लता” और पागल हो रहे विकास को “जय श्री राम” का उच्चारण करते ही एक झटके में भूल जाते हैं |

खैर, अब तो इसकी आदत हो गई है |
सुना है “श्री श्री” कोई फ़ार्मूला लेकर आए हैं |
हाँ भाई, हम भी सुने हैं कुछ 1400 करोड़ का भी जिक्र हुआ था |
अब जो भी हो, कम से कम भूख से मरने वाली सन्तोषी को यह पता रहता कि “जय श्री राम” में इतना पैसा है तो वो भी “राशन” कार्ड को आधार से लिंक कराने के चक्कर में नहीं पड़ती |

पॉलिटिकल लव: कहां लिखा है कि प्यार में चॉकलेट देना ही है?

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मिथक और इतिहास की आंख से वर्तमान को देखते थे कुंवर नारायण

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