जो उजाला उसके सिर पर है, वह उसके जीवन में कब आएगा? बता मेरे देश वह गांधी का सपना कब पूरा हो जाएगा? जो देख […]
Author: अभय
जो वह बेच रहा था, वह उससे ही दूर था
जो वह बेच रहा था, वह उससे ही दूर था, अब याद आ रहा है, मार्क्स का वह अलगाववाद जो उसके बहुत करीब था। वह […]
पॉलिटिकल लव: प्यार को सुप्रीम कोर्ट की तरह सीरियस लो
तुम इतने गोरे कैसे हो रहे हो? अरे घर पर रहने का यही फायदा है, मुझे लगा तुम भी मशरूम खाने लगे हो! अरे नहीं […]
पॉलिटिकल लव: प्यार में ईवीएम जैसा बहाना मत बनाना
हमारे प्यार में कितनी बँधाएं हैं ना? कितनी भी हों राम मंदिर से कम ही हैं, वैसे राम मंदिर की बंधाएं दूर हो गई हैं, […]
पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ विवाद करते हैं
तुम भी भारतीय रेल हो गए हो अरे क्या हुआ ऐसे क्यों बोल रही हो? जब देखो जब तुम्हारी हालत खस्ता ही नजर आती है. […]
पॉलिटिकल लव: कहां लिखा है कि प्यार में चॉकलेट देना ही है?
अच्छा ये कहां लिखा है कि प्यार में चॉकलेट देना ही है! लिखा तो ये भी नहीं है दिल्ली देश की राजधानी है! हाहाहाहा, ये […]
भुख्खड़ प्यार: आओ तुम्हें बंदगोभी जैसा दिल में कैद कर लूं
जब किसी ऐसे बन्दे को प्यार हो जो बहुत खाता हो तो क्या होगा …. यार तुम मुझे अपना बना लो, मैं हरदम समोसे के […]
पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में पैराडाइज चलते हैं…
तो तैयार हो न तुम? क्यों तुम कोई बड़ा बदलाव करने वाली हो क्या प्यार में? सोच रही हूँ कुछ बदल ही लेते हैं अपने […]
बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं
“हवा के दोश पे उड़ती हुई ख़बर तो सुनो हवा की बात बहुत दूर जाने वाली है” —हसन अख्तर जलील आज बाजार किसी भी हालात […]
पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ राष्ट्रीय करते हैं
चलो प्यार में कुछ राष्ट्रीय करते हैं हां सोच रहा हूँ प्यार में राष्ट्रीय भोजन ले आऊँ लेकिन देखना खिचड़ी जैसा बोरिंग भोजन मत ले […]