तकनीक ट्रांसफर न होने से भारत को इस सौदे में आर्थिक, रणनीतिक, सुरक्षा, तकनीक जैसे कई मोर्चों पर घाटा ही हुआ, यह साफ हो जाता है.
Author: लोकल डिब्बा टीम
बहुत क्रूर और भयावह होता जा रहा है मीडिया का चरित्र
घटनाएं जितनी भयावह और वीभत्स होंगी, संपादकों के चेहरे पर उतनी ही प्यारी मुस्कुराहट तैरती नजर आएगी.
सब राहों के अन्वेषी बचे-खुचे जंगलों के साथ ही कट गये
अब नहीं हैं प्रणययार्थी, न उनकी गणिकाऐं, वो गदिराए बदन भी नहीं हैं जिनपर लिख सको कामसूत्र जैसा ग्रंथ
तुम ज्ञान के लिए यात्राएँ क्यों करोगे जब तुम्हारे हाथ में किताबें हैं जिनमें लिखे हैं यात्राओं के विवरण
ख़ुदकुशी…भवेश दिलशाद (शाद) की नज़्म
इसी इक मोड़ पर अक्सर गिरा जाता है ऊंचाई से अपनी ज़ात और ख़ाका मिटाया जाता है सब कुछ हो जिसमें ये सिफ़अत, क़ूवत कि जो अपना सके, जो घोल पाये सब कुछ अपने में
ग़मे-दिल और ग़मे जानां कहे बिन सह सके जो सब किसी इतनी बड़ी हस्ती के पहलू में किया जाता है सब कुछ गुम.
आर्टिकल 370 भी नहीं रहा, आखिर कब बंद होगी कश्मीरी पंडितों की हत्या?
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हो चुका है। रास्ते का रोड़ा माना जाने वाला अनुच्छेद 370 भी प्रभावी नहीं है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब केंद्र […]
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मार्च का महीना था। कोरोना के डर से लोग कांप गए थे। पहले स्कूल-कॉलेज बंद हुए। दफ्तर बंद होने लगे। आखिर में रेल और हवाई […]
हम फिर वापस आएंगे!
फिर से हम जिन्दा लाशें,अपने मरे हुए सपनों से, नाउम्मीदी ओर जिल्लत की जिंदगी सेफिर से हम आपके रुके हुए शहर को चलना सिखाएंगे,फिर से आपकी जिंदगी खुशनुमां बनाएंगे.
शहरों से ठोकर मिला, हम चल बैठे गांव
माना अपने गांव में, रहता बहुत कलेस। कुल पीड़ा स्वीकार है, ना जाइब परदेस।
लॉकडाउन में शराब मिलने के बाद पढ़ें बेवड़ों का इंटरव्यू
देश एक मुश्किल दौर से गुजर रहा हैं। हम सब नौकरी से लेकर जान तक गवां रहे हैंं लेकिन एक वर्ग ऐसा भी हैं, जो […]