ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं। राष्ट्रीय चेतना से भरपूर उनकी रचनाएं आज भी साहित्य-प्रेमियों […]
Author: लोकल डिब्बा टीम
क्या गांधी के देश में विरोध का स्वरूप गांधी के विरोध की तरह है?
लोकतंत्र में विरोध होना जायज है। जब-तक जनता अपनी स्वस्थ मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध नहीं करेगी तब तक वह लोकतंत्र लगभग अधूरा रहेगा।और जब यह विरोध ख़त्म हो जाएगा तो वह लोकतंत्र तानाशाही में परिवर्तित होने लगेगी,लेकिन प्रश्न यह है कि विरोध का स्वरुप कैसा हो??
फेसबुक को बाबा पसंद हैं
फेसबुक ने भारत के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री का खिताब योगी आदित्यनाथ को दिया है.
मोदी जी गरीबी किताबों में पढ़ कर नहीं समझे हैं
मोदी जी युग पुरुष हैं. ऐसे युग पुरुष जिसके सामने कोई पांच मिनट नहीं टिक सकता राहुल गांधी के अलावा.
हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं
हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं. चरस, भांग, गांजा और अफीम भारत में प्रतिबंधित है. मतलब आप वैधानिक रूप से फूंक नहीं सकते. कहीं पब्लिक प्लेस […]
नहीं आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा
नज़र आता है डर ही डर, तेरे घर-बार में अम्मा नहीं आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा. यहाँ तो कोई भी रिश्ता नहीं विश्वास […]
कठुआ की वारदात धार्मिक कट्टरता का सबसे नीचतम रूप है
इस पूरी वारदात को मंदिर से हटाकर इसलिए भी नहीं देखा जा सकता क्योंकि इस घटना के पीछे धार्मिक द्वेष है
बुक रिव्यू: चार अधूरी बातें
कभी-कभी एक मुलाक़ात में बहुत सारी बातें हो जाती हैं और कभी-कभी बावजूद बहुत सारी मुलाक़ातों के कुछ बातें अधूरी रह जाती हैं। यह अधूरी […]
न प्रेस कार्ड है, न प्रिंटिंग प्रेस, न नौकरी, फिर भी अखबार निकालता है यह पत्रकार
मुज़फ्फर नगर में एक पत्रकार ऐसा भी है जिसके पास न अपनी छपाई मशीन है, न कोई स्टाफ और न सूचना क्रांति के प्रमुख साधन-संसाधन। […]