Author: अविनाश मिश्रा
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बिहार परिवहन: जाति की गाड़ी और ‘सुशासन’ का पहिया
आजादी के इतने सालों के बाद भी व्यवस्था लाख दावे करे लेकिन वह जाति व्यवस्था को कमजोर नहीं कर सकी है। अगर दूसरे शब्दों में कहा जाए तो व्यवस्था ही जाति आधारित राजनीति की अप्रत्यक्ष रूप से पोषक है। समय के साथ यह व्यवस्था धीरे-धीरे विघटनकारी होती जा रही है। दुर्भाग्य से यह देश के…
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विकलांग को दिव्यांग कहने का समाज में कितना असर हुआ?
दिव्यांग शब्द सुनते ही हर किसी के मन में दया का भाव पैदा होता है। बड़ी तत्परता से लोग सहानुभूति दिखाने को आतुर हो जाते हैं लेकिन वही लोग कई बार मौका आने पर पीछे भी हट जाते है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो संबोधन कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा था कि…