बाबा नागार्जुन: एक अल्हड़ जनकवि, जिसकी पीड़ा में पलता है भारत

नागार्जुन की खासियत है कि उन्हें कोई अनगढ़ साहित्यकार पढ़े तो भाषाई रूप से समृद्ध हो जाए.

बदनाम ही सही लेकिन गुमनाम नहीं हूं मैं: मंटो

विभाजन और विभाजन से होने वाले दंगे का मंटो पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था. इस त्रासदी को मंटो के लिए सह पाना बहुत कठिन था. इसी कारण दंगो के दुष्प्रभाव का जितना मार्मिक चित्रण मंटो की कहानियों में मिलता है, उसे कहीं और ढूंढ पाना बहुत कठिन है

कैफी आजमी की पुण्यतिथि पर सुनिए उनके पांच कालजयी गीत

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जन्में अख्तर हुसैन रिजवी उर्फ कैफी आजमी ने मात्र ग्यारह साल की उम्र में शायरी लिखनी शुरू कर दी थी. और किशोर होते-होते मुशायरे में शामिल होने लगे.

किस्सा: मरते-मरते लाला ने ऐसा क्या किया जो गांव भर पहुंच गए जेल

किसी गांव में एक मुंशी रहता था, नाम था खटेसर लाल। बहुत धूर्त और काइंया किस्म का आदमी था। जितनी भद्दी शक्ल उतनी ही बुरी […]

चस्का नीली बत्ती का और काम पप्पू पंचर वाले

बेटवा! जेतना मन हो उतनी मटरगश्ती करना लेकिन माथे पर तुमको नीली बत्ती ठोकवा कर ही वापस आना है। ये बातें रामसुमेर ने सत्यप्रकाश को […]

श्रद्धांजलिः नहीं रहे उर्दू ‘गीताकार’ और शायर अनवर जलालपुरी

अनवर ने एक बार कहा था कि छात्र जीवन से ही उनके दिमाग में यह बात थी कि कुरआन तो उन्होंने पढ़ी ही है तो क्यों न हिंदू धर्म की किताबें भी पढ़ी जाएं।

प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।

पुण्यतिथि: अवधी का वह कवि जिसने अज्ञेय से मिलने से मना कर दिया

गांव से ताल्लुक रखने वाले लोग कथरी (गुदड़ी) को खूब समझते होंगे। हमारी और हमारे पूर्वजों को बचपन में फोम और रूई के गद्दे नहीं […]