Category: नेशनल

  • वाह रे अपनी सुब्ह-ए-बनारस, घाट के पत्थर जैसे पारस
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    वाह रे अपनी सुब्ह-ए-बनारस, घाट के पत्थर जैसे पारस

    काशी न सिर्फ शिव की नगरी अपितु गंगा की और संगीत की नगरी है। संगीत जो वहाँ गंगा के कल-कल, छल-छल की ध्वनि के साथ वहाँ की आबोहवा में रमा है। बिस्मिल्ला खान,बेगम अख्तर, गिरिजा देवी ,पंडित छन्नूलाल इन सभी ने बनारस घराने को विश्व पटल पर अंकित किया। संगीत कभी मौन नही होता, बस…

  • विकास की आग लोगों के शरीर तक पहुंच रही है
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    विकास की आग लोगों के शरीर तक पहुंच रही है

    कभी जीवन में किसी अनजान क्षितिज तक पहुँच कर आप भी ऐसे दौर पर पहुँचे होंगे कि कोई हाथ बढ़ाए और आपको दुविधा से बाहर निकाले। हर दौर में जहाँ सहायता करने वालों की कमी नहीं है, वहीं कुछ लोग तमाशबीन बनकर मंजर को देखते हैं। अब लोग तमाशा फेसबुक पर अपलोड करने के लिये…

  • छठ पूजा: उत्तर भारत का ग्रेट कार्निवाल
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    छठ पूजा: उत्तर भारत का ग्रेट कार्निवाल

    बिहार का महापर्व छठ जिसे आज भारत के बहुत से राज्यों में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है, उसकी शुरुआत हो चुकी है। दीवाली के छठवें दिन से शुरू होने वाला यह महापर्व बिहार का सबसे बड़ा और प्राचीन पर्व है। इस पर्व में सूर्य की आराधना की जाती है। माना जाता है कि भगवान…

  • भगोड़े बने थे भाजपाई अब हालत धोबी के कुत्ते जैसी
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    भगोड़े बने थे भाजपाई अब हालत धोबी के कुत्ते जैसी

    राजनीति में दल बदलना कोई बड़ी बात नहीं। पिछले साल से तो यह अब हर विधानसभा चुनाव में देखने को मिल जाता है। यहां वो कहावत बड़ी फिट बैठती है ‘जहां खीर वहीं फिर’ पर कभी कभार ऐसे लोगों की हालत धोबी के कुत्ते जैसी हो जाती है यानी न घर का, न घाट का।…

  • कश्मीर को जोड़ने वाली डोर अब सड़ रही है!
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    कश्मीर को जोड़ने वाली डोर अब सड़ रही है!

    कश्मीर में उग्रवाद, उन्माद, कट्टरवाद, पहले से नहीं रहा है। कश्मीर में कई सूफी संस्कृतियां पैदा हुईं हैं। कश्मीर सूफी, संतो का स्थल था। वहां विभिन्न धर्मों के प्रचारक, विचारक शांति के लिए जाते थे। राजतरंगिणी में कल्हड़ ने एक बार कहा था कि कश्मीर के लोग पुष्प की तरह कोमल होते है। 1953 में…

  • काली पन्नी के पीछे छुपा दर्द!
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    काली पन्नी के पीछे छुपा दर्द!

    माँ क्यों कहती हो मत छूना उस काली पन्नी को? क्या छुपा है माँ उस काली पन्नी में? क्यों नहीं बताती माँ क्या ले आती हो उस काली पन्नी में? क्या लपेटा है उन कागजों के बीच उस काली पन्नी में? माँ तुम अचार देना बंद कर देती हो घर में आते ही उस काली…

  • आजादी के 70 साल बाद भी यह भूख है बड़ी!
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    आजादी के 70 साल बाद भी यह भूख है बड़ी!

    2017 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स का आंकड़ा इंटरनेशनल फ़ूड पालिसी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पेश कर दिया है। पिछले साल की तुलना में भारत की स्थिति और भी भयंकर हो गई है। साल 2016 की रिपोर्ट में भारत को 97वां स्थान स्थान मिला था। तब भारत में इसको लेकर खूब हो हल्ला हो रहा था…

  • क्या संस्कार की बजाय बलात्कार में बदल रहा है विवाह?
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    क्या संस्कार की बजाय बलात्कार में बदल रहा है विवाह?

    हमारे भारतीय समाज  में विवाह को बहुत ही पवित्र माना जाता है, कहा जाता है विवाह दो आत्माओं, दो परिवारो का मिलन होता है लेकिन जब ये संस्कार बलात्कार में परिवर्तित होता है तब क्या होता है? आइए इसके कुछ बिन्दुओ पर चर्चा करें। सबसे पहले तो ये कि लोग शादी क्यों करते है? आप…

  • क्या सिर्फ दिवाली के दिन की जागरूकता हमारे पर्यावरण को बचा सकती है?
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    क्या सिर्फ दिवाली के दिन की जागरूकता हमारे पर्यावरण को बचा सकती है?

    दिवाली आने में बस कुछ ही दिन बच गए हैं, दिवाली प्रेम और प्रकाश का त्योहार है। दिवाली आते ही लोगों के चेहरे की रौनक बढ़ जाती है, आस-पास का माहौल खुशनुमा हो जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह का माहौल रहता है लेकिन हर बार दिवाली हमें कुछ अच्छी यादों के…

  • आरुषि हत्याकांड: किस वाली कोर्ट पर ज्यादा भरोसा करें?
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    आरुषि हत्याकांड: किस वाली कोर्ट पर ज्यादा भरोसा करें?

    9 साल पहले एक लड़की और एक नौकर को बेरहमी से मारा गया, पहुंचे-पहुंचाए लोगों का मामला था इसलिए खूब कवर हुआ और फिल्म भी बन गई लेकिन न्याय व्यवस्था आज भी अपराध के सामने हांफती दिख रही है। सीबीआई की दलीलों और सबूतों के दम पर निचली अदालत ने लड़की के माँ-बाप को दोषी…