यहां घर की दीवाल पर बनाते हैं पुरूष लिंग का चित्र…

लोग अपने घरों की दीवारों पर अगर पुरुष के लिंग की तस्वीरें बना लें तो आप इसे क्या कहेंगे? पागलपन या वहशीपना या उस पूरे घर को ही आप कामुक घर साबित कर देंगे| हम और आप तो ऐसे घरों पर इ मां , अइयो अप्पा , हे भगवान, ओ माय गॉड या शेम शेम करके इसे अश्लील संस्कृति के लोगों का घर बता देंगे| मान लेंगे की यह पूरा घर सरस सलिल पढ़ता होगा और यहां दिन रात लोग बस भोग विलास में ही जुटे रहते होंगे| इसकी बातें नॉन वेज होंगी तो जिंदगी वैश्यालय से कम नहीं|

तो अगर आप ऐसा सोच रहें है तो अपनी इस पतित पावन सोच पर ब्रेक लगाइए क्योंकि आपको जान कर हैरानी होगी कि यह कोई अश्लीलता नहीं है बल्कि हमारे पड़ोसी देश भूटान की एक संस्कृति है| जी हां हमारे पड़ोसी देश ,भूटान में कई सालों से यह परंपरा है कि वहां दीवारों पर बड़े, छोटे पुरुष के लिंग की तस्वीरें बनाई जाती है| ये पेंटिंग्स प्राचीन बौद्ध परंपरा की साक्षी हैं| भूटान में यह फैलस( phallus) पेंटिंग के नाम से जाने जाते हैं| भूटान में ऐसा माना जाता है कि लिंग की प्रतिमा बुरी आत्माओं को दूर रखती है और बुरी भावनाओं से हमें बचाती है| और इन बुरी भावनाओं में कामुकता भी शामिल है|

भूटान की एक और दन्त कथाओं या कल्पित कहानियों की माने तो इस संस्कृति के जनक दृक्पा कुंले थे| यह भूटान में आया हुआ एक विचित्र बौद्ध भिक्षु था जो कि अपना पूरा समय मदिरापान, महिलाओं के साथ यौन संबंध और कामुकता में व्यतीत करता | वो अपने अनुचरों को शिक्षा देता था कि मनुष्य को सांसारिक लफड़ों और टीम टामरों से दूर रहना चाहिए और सादा जीवन व्यतीत करने का अनुसरण करना चाहिए| जिसमें सादे जीवन से उसका मतलब था कि आध्यात्म की खोज और कामुकता की उदारता| भूटान में इस महाशय का एक मंदिर है जो इन पेटिंग्स से सजा धजा हुआ है| वहां कामुकता की पूजा होती है और भूटान के पश्चिमी भाग के लोग इस परंपरा को मानते हुए हर साल इस मंदिर में संतान प्राप्ति के लिए आते हैं|

इसके अलावा इस महान भिक्षु के बारे में यह भी कथा है कि कभी कभार यह अपने गले में रस्सी बांध कर घुमते थे | आपको जानकार हैरानी होगी कि यह रस्सी उसके लिंग को लपेटते हुए बंधी होती थी जिसे वो गर्दन तक पहुंचाकर अपने गले में लपेट लेता था| उसका मानना था कि इससे जब भी वो औरतों के साथ होगा तो उसे सौभाग्य की प्राप्ति होगी| है न गजब की पागलपंती! यह कथा तो भूटान के पश्चिमी भाग की थी पर अगर आप पूर्वी भाग की कथा सुनेंगे तो सुनकर और भी भौचक्के रह जाएंगे|

दरअसल पूर्वी भूटान में साल के किसी विशेष समय पर पुरुष के लिंग की पूजा की जाती है ,उसे दूध चढ़ाया जाता है और लकड़ी से बने हुए प्रतीकात्मक लिंग मेहमानों के गिलास में दाल कर उनकी चाय ,दूध ,शरबत और शराब से खातिरदारी की जाती है|

इतना ही नहीं हमारे आपके यहां जो नए घर में घरवास की पूजा होती है तो भूटान में नए घरों में घरवास की पूजा के दौरान घर के चारों कोनों पर लकड़ी से बनाए पुरुष के लिंगों की पूजा करने और टांगने की परंपरा है | इस पूजा के दौरान लोग चार अलग अलग डलियों में लकड़ी से बने लिंगो को डालकर पूजा करते हैं फिर घर के मर्द उसे रस्सी से बांधकर ऊपर यानी घर के छत की ओर खींचते हैं तो उसी डलिए को घर की औरतें नीचे से रस्सी बांध कर जमीन की ओर खींचती हैं| इस तरह अंत में चारों कोनों पर चार अलग अलग रंग के छोटे बड़े लकड़ी से बने पुरुष के लिंगो को बांध दिया जाता है और ईश्वर से प्राथना की जाती है कि यह लिंग घर को बुरी बलाओं से बचाए| घर में सदा सुख,शांति और भाईचारा बना रहे | इसी तरह लोग घरों की दीवारों पर भी लिंगों की तस्वीरें या पेंटिंग बनवा लेते हैं| ताकी उनका घर भूत प्रेत और बलाओं से बचे और खानदान बढ़े| तो बोलिए गुरु हुए न आप भौचक्के और माथा पकड़के बैठते हुए कहिए राम, राम ,राम, भला अइसनो कोई संस्कृति होवत है !

तो समझे दुनिया बड़ी विचित्र है प्यारे| जिसे आप और हम भोग की वस्तु समझते हैं वो किसी के घर का वास्तु शास्त्र ठीक करने का टोटका है तो किसी सिरफिरे बौद्ध भिक्षु के लिए भोग में भी शौभाग्य ढूढ़ने का तरीका| इस गोल दुनिया में अपनी गोल गोल अँखियों को घुमाइए नहीं तो हर बार बात बात पर आप राम राम और हे राम ही कहते रह जाएंगे|

इस लेखक के और लेख

चीन आखिर चाहता क्या है?

रोमांचक हुआ क्रिकेट: नियंत्रक और इतिहासकार का तालमेल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

August 2026
S M T W T F S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031